{"_id":"5fd552ff8ebc3e410f760877","slug":"new-relationships-are-being-formed-every-day-in-the-city-on-the-highway","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईवे पर बसे शहर में हर दिन बन रहे नए रिश्ते, आंदोलन की रीढ़ बना बॉर्डर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईवे पर बसे शहर में हर दिन बन रहे नए रिश्ते, आंदोलन की रीढ़ बना बॉर्डर
Sun, 13 Dec 2020 05:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 13 Dec 2020 05:02 AM IST
विज्ञापन
सिंघु बॉर्डर...
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अभी बीस दिन पहले की बात है, जीटी रोड स्थित सिंघु बॉर्डर से फर्राटे से वाहन निकलते थे जबकि आज दिल्ली-हरियाणा की इस सीमा पर पहुंचने से पहले ही सड़क ठहर सी जाती है। दिल्ली को पंजाब से जोड़ने वाले इस हाइवे से वाहन गुजारने की छोड़िए, पैदल निकलना भी असान नहीं है। चलते-चलते इसका अंदाजा भी नहीं लग पाता कि आप किसी सड़क पर हैं। अहसास किसी अनियोजित शहरी बस्ती में पहुंच जाने का होता है, जिसकी रिहायश हर दिन बढ़ रही है।
विज्ञापन
कहीं सड़क के दाएं-बाएं तो कहीं बीच में बिलकुल सटकर व बेतरतीब खड़े ट्रैक्टर व ट्रालियां आशियाने की तरह नजर आती हैं। इन्हीं के बीच से दोनों तरफ की आवाजाही होती है। इस अस्थाई बसे शहर में खानपान की कोई कमी नहीं है। हर दस-पंद्रह रिहायश के बीच आपको लंगर मिल जाएगी, जहां दिन भर पकने वाले लजीज व्यंजनों से मुंह में पानी आ जाना बहुत मुकिश्ल नहीं है। घर और रसोई के अलावा छोटी-छोटी दुकानें भी यहां आम हैं। यहां दैनिक जरूरत का सामान भी खरीदा जा सकता है।
विज्ञापन
मजेदार यह कि यह सब सिंघु बॉर्डर पर ही सिमटा हुआ है। सोनीपत की तरफ दूर-दूर तक जीटी रोड पर यही आलम दिखता है। खास बात यह कि हर दिन इसकी आबादी बढ़ती जा रही है। पंजाब की तरफ से आने वालों का सिलसिला जारी रहने से शहर की पिछला हिस्सा बढ़ा होता जाता रहा है।
विज्ञापन
भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के महासचिव ओंकार सिंह बताते हैं कि पीछे से किसानों के आने का सिलसिला जारी है। हर दिन बड़ी संख्या में किसान पंजाब व हरियाणा से दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं। इससे आंदोलन स्थल हर दिन बड़ा होता जा रहा है
बॉर्डर पर बन रहे नए-नए रिश्ते
दिन भर साथ रहने से यहां लोगों के बीच नए-नए रिश्ते बन रहे हैं। अमृतसर के गुरूप्रताप सिंह का कहना है कि जिंदगी रूटीन सी चल रही है। आस-पास रहने वाले लोगों से यारियां भी हुई हैं। बीते दस दिनों में पांच-सात नए लोगों से परिचय हुआ है। दिन भर साथ रहने से सब दोस्त बन गए हैं। इन्हीं के बीच अपनी खुशियां, गम साझा करते-करते दिन गुजर जाता है।
किसान आंदोलन का रणनीतिक स्थल बना सिंघु बॉर्डर
पंजाब के प्रमुख किसान संगठनों के सिंघु बॉर्डर पर जमा होने से यह इलाका आंदोलन की रीढ बन गया है। आंदोलन की सारी रणनीति बैठकें यहीं होती हैं। किसान नेताओं के यहां लिए जाने वाले फैसलों पर दिल्ली समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी अमल होता है।
सिंघु बॉर्डर पर ही मंच
दिल्ली की तरफ से चलने पर सबसे पहले पुलिस की बैरीकेड मिलती है। इसे पार करते ही छोटा सा पांडाल, जहां दिन भर किसान नेताओं की बैठकों की चलती रहती है। थोड़ा और आगे बढ़ने पर पुलिस की दूसरी बैरीकेड मिलती है। आगे बढ़ते ही शहर की सीमा में शुरू हो जाती है। किसानों को संबोधित करने के लिए यहां बड़ा सा मंच बना है। यहां से किसानों का उनके नेता संबोधित करते हैं।