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लोकपाल के बहाने फिर सियासी जमीन पर उतरेगी एक नई पार्टी

Mon, 30 Nov 2015 09:50 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Nov 2015 09:50 AM IST
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New political party may appear under the pretext of Lokpal Bill.

नई पार्टी बनाने की कगार पर खड़े योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण व उनके स्वराज अभियान के सहयोगी दिल्ली सरकार के प्रस्तावित लोकपाल बिल संजीवनी के तौर पर देख रहे हैं।

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अभियान के रणनीतिकारों का मानना है कि लोकपाल आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के लोकपाल बिल के विरोध से दोहरा फायदा हो सकता है।

प्रस्तावित बिल की खामियों पर वार करने से आप की साख गिर सकती है। वहीं, मजबूत लोकपाल कानून की मांग से निकली नई पार्टी लोगों में दोबारा उम्मीद पैदा करेगी।

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स्वराज अभियान से मजबूत हुए योगेन्द्र-प्रशांत

New political party may appear under the pretext of Lokpal Bill.

दरअसल, आप से बाहर होने के बाद योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण व उनके सहयोगियों और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनकी पार्टी के आरोपो-प्रत्यारोपों को मुद्दों से ज्यादा निजी विरोध के तौर पर देखा गया।


यही वजह रही कि स्वराज अभियान के सहारे निष्कासित नेताओं ने किसान आंदोलन की राह पकड़ ली। पिछले करीब नौ महीनों में योगेंद्र यादव दो बार किसान यात्रा कर भी चुके हैं।

एक बार एनडीए सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ निकली यात्रा पंजाब से दिल्ली के बीच थी। तो दूसरी में कर्नाटक से हरियाणा के बीच सूखा प्रभावित किसानों से योगेंद्र यादव ने मुलाकात की। वहीं, बुंदेलखंड इलाके के किसानों का दर्द टटोलने वाला एक सर्वे भी किया।

मोर्च के लिए मुद्दा बनेगा लोकपाल बिल

New political party may appear under the pretext of Lokpal Bill.

फिलहाल मुद्दों के आधार पर पहली बार स्वराज अभियान आप से टकरा रहा है। दिल्ली सरकार के प्रस्तावित लोकपाल बिल पर दो दिनों में दूसरी बार प्रशांत भूषण व शांति भूषण मीडिया के सामने आए। दोनों मौकों पर उन्होंने केजरीवाल, दिल्ली सरकार और आप पर कड़ा हमला किया।

दिलचस्प यह कि इस वक्त अभियान की राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक चल रही है। सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की भी बैठक होगी। इसमें पार्टी गठन पर विचार होगा।

हालांकि, एक पदाधिकारी ने लोकपाल बिल के विरोध व अभियान की बैठक को महज संयोग बताया। लेकिन इतना जरूर कहा कि लोकपाल के मसले पर अभियान दिल्ली सरकार को फ्री हैंड नहीं छोड़ा जाएगा।

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