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Delhi: नई हुई पुरानी मेट्रो, उम्र 15 साल हुई कम, CCTV से लेकर LED की दी जा रही सुविधा, 35 मेट्रो का कायाकल्प

Wed, 28 Jun 2023 06:50 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 28 Jun 2023 06:50 PM IST
सार

नवीनीकरण योजना के तहत अब तक 35 ट्रेनों को आधुनिक किया गया है, जोकि इस योजना का 50 फीसदी कार्य है। वर्ष 2025 तक कुल 70 ट्रेनों का कायाकल्प किया जाना है।

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new old Delhi Metro has reduced its lifespan by 15 years
दिल्ली मेट्रो (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

डीएमआरसी की पुरानी हो चुकी मेट्रो का तेजी से कायाकल्प किया जा रहा है। यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। इससे यात्रियों को नई ट्रेनों की तरह आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं। मेट्रो में नए फर्श, बैठने की सीट, एलईडी लाइट व सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी समेत कई उपकरण लगाए जा रहे हैं। 

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नवीनीकरण योजना के तहत अब तक 35 ट्रेनों को आधुनिक किया गया है, जोकि इस योजना का 50 फीसदी कार्य है। वर्ष 2025 तक कुल 70 ट्रेनों का कायाकल्प किया जाना है। बता दें यह वह ट्रेन हैं, जो मेट्रो के पहले कॉरिडोर के परिचालन में लाई गई थी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) का दावा है कि इससे नई मेट्रो को खरीदने में आने वाले करोड़ों रुपये की बचत होगी।

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2002 से 2007 के बीच की है मेट्रो
दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो यात्रा करने के लिए सबसे सुगम माध्यम है। मई व जून माह के मध्य में इन सभी नवीनीकृत ट्रेनों की दशा सुधर गई है और यात्रियों की सेवाओं के लिए संचालित की जा रही हैं। पुरानी मेट्रो ट्रेनें वर्ष 2002 से 2007 के बीच की हैं, जोकि प्रथम चरण में आई थी। इनमें द्वितीय व तृतीय चरण की ट्रेनों की तरह न तो मोबाइल व लैपटॉप चार्जिंग प्वाइंट्स की सुविधा थी और न एलसीडी आधारित रूट मैप व सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। लंबे समय तक सेवा में रहने के कारण कोच की रंगत भी खराब होने लगी है, फर्श क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पेंटिंग भी उखड़ रही है। इनमें कई ट्रेन ऐसी हैं जो कि दो दशक से सेवा में थी। ऐसे में इन ट्रेन में नई एलईडी लाइट्स और एलसीडी आधारित नए डायनमिक रूट मैप लगाए गए हैं।


 
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सभी बोगियों के बाहर और अंदर सीसीटीवी कैमरे

मेट्रो के प्रत्येक कोच में अंदर और बाहर की तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पहले इन ट्रेनों में एक भी कैमरा नहीं था। इसके अलावा स्मोक डिटेक्टर्स, फायर एक्सटिंग्विशर्स, नई फ्लोरिंग, कोच के अंदर और बाहर की डेंटिंग पेंटिंग और लेक्ट्रिकल पैनल्स की पूरी सर्किट को बदला गया है, इससे ट्रेन के अंदर तारों में फॉल्ट होने की समस्या भी नहीं आएगी। अब इनकी सूरत बदली जा रही है। मेट्रो प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अगले कुछ माह में 10 और ट्रेनों में नई ट्रेन की तरह सुविधाएं मिलने लगेगी।



 

2002 में रेड लाइन पर शुरू हुआ था परिचालन

मेट्रो प्रबंधन से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि दिल्ली में जो मेट्रो चल रही है उनमें एक मेट्रो ट्रेन की आयु 30 वर्ष की होती है। रेड लाइन पर मेट्रो का परिचालन वर्ष 2002 में शुरू हुआ था। इसके बाद वर्ष 2005 तक येलो लाइन और ब्लू लाइन पर भी मेट्रो चलने लगी थी। इस तरह से कई ट्रेनों की आयु लगभग 20 वर्ष हो चुकी है। 10 पुरानी ट्रेनों का कायाकल्प करने के लिए निविदा जारी कर दी गई है। इनमें से अधिकांश रेड लाइन की ट्रेनें हैं। 


 

डीएमआरसी के एक अधिकारी ने बताया कि रोजाना एक ट्रेन 15 से 16 घंटे परिचालन में रहती है। वहीं, एक दिन में 400 किलोमीटर के लगभग चलती है। मौजूदा समय में डीएमआरसी के पास लगभग 350 ट्रेनें हैं। ऐसे में इन पुरानी हो चुकी ट्रेन में यात्रियों के लिए आरामदायक, सुविधायुक्त और सुरक्षित सफर कराना मेट्रो प्रबंधन का महत्वपूर्ण कार्य है।


 

पुरानी ट्रेनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। यात्रियों को अधिक से अधिक सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए मेट्रो प्रबंधन दिन-रात कार्य कर रहा है। आने वाले दिनों में ऐसी ही कुछ ओर मेट्रो ट्रेन यात्रियों की सेवा में जल्द आएगी। -अनुज दयाल, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, डीएमआरसी

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