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Delhi NCR News: फरवरी तक आकार लेंगे नए श्रम नियम, हाईकोर्ट में केंद्र का दावा
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-नए श्रम नियमों पर याचिका दाखिल कर कानून शून्यता का दावा किया था
-केंद्र सरकार ने कहा, अधिसूचना के साथ ही पुराने नियम समाप्त हो गए हैं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत नियमों को फरवरी 2026 के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ को बताया कि जनता से सुझाव मांगे गए हैं और नियमों का निर्माण विचाराधीन है।
कोर्ट औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के क्रियान्वयन पर दाखिल एक याचिका की सुनवाई कर रहा थी। यह संहिता ट्रेड यूनियनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में रोजगार की शर्तों तथा औद्योगिक विवादों के निपटारे से संबंधित सभी कानूनों को समेकित करती है। याचिकाकर्ता एन.ए. सेबेस्टियन और सुनील कुमार ने दावा किया था कि केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को गजट अधिसूचना जारी कर संहिता को अधिसूचित तो कर दिया, लेकिन नए व्यवस्था को लागू करने के लिए नियम नहीं बनाए गए तथा इसके अंतर्गत ट्रिब्यूनल भी गठित नहीं किए गए।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने बताया कि केंद्र ने सोमवार को ही दो अधिसूचनाएं जारी की हैं, जिनसे मौजूदा कमियों को दूर किया गया है और सुचारू संक्रमण सुनिश्चित किया गया है। इन अधिसूचनाओं के माध्यम से पुराने श्रम कानूनों को 21 नवंबर 2025 से प्रभावी रूप से निरस्त कर दिया गया है तथा स्पष्ट किया गया है कि पुराने श्रम कानूनों के अंतर्गत गठित ट्रिब्यूनल नए संहिता के अंतर्गत वैधानिक निकायों के गठन तक कार्य करते रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि यदि नियमों के निर्माण के बाद नए श्रम संहिता के क्रियान्वयन में कोई रुकावट आती है, तो याचिकाकर्ता उस समय नई याचिका दायर कर सकते हैं। यह संहिता 29 पुराने श्रम कानूनों को प्रतिस्थापित करने वाली चार श्रम संहिताओं में से एक है, जिसका उद्देश्य श्रम क्षेत्र में सुधार और सरलीकरण लाना है।
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-केंद्र सरकार ने कहा, अधिसूचना के साथ ही पुराने नियम समाप्त हो गए हैं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत नियमों को फरवरी 2026 के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ को बताया कि जनता से सुझाव मांगे गए हैं और नियमों का निर्माण विचाराधीन है।
कोर्ट औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के क्रियान्वयन पर दाखिल एक याचिका की सुनवाई कर रहा थी। यह संहिता ट्रेड यूनियनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में रोजगार की शर्तों तथा औद्योगिक विवादों के निपटारे से संबंधित सभी कानूनों को समेकित करती है। याचिकाकर्ता एन.ए. सेबेस्टियन और सुनील कुमार ने दावा किया था कि केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को गजट अधिसूचना जारी कर संहिता को अधिसूचित तो कर दिया, लेकिन नए व्यवस्था को लागू करने के लिए नियम नहीं बनाए गए तथा इसके अंतर्गत ट्रिब्यूनल भी गठित नहीं किए गए।
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सॉलिसिटर जनरल मेहता ने बताया कि केंद्र ने सोमवार को ही दो अधिसूचनाएं जारी की हैं, जिनसे मौजूदा कमियों को दूर किया गया है और सुचारू संक्रमण सुनिश्चित किया गया है। इन अधिसूचनाओं के माध्यम से पुराने श्रम कानूनों को 21 नवंबर 2025 से प्रभावी रूप से निरस्त कर दिया गया है तथा स्पष्ट किया गया है कि पुराने श्रम कानूनों के अंतर्गत गठित ट्रिब्यूनल नए संहिता के अंतर्गत वैधानिक निकायों के गठन तक कार्य करते रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि यदि नियमों के निर्माण के बाद नए श्रम संहिता के क्रियान्वयन में कोई रुकावट आती है, तो याचिकाकर्ता उस समय नई याचिका दायर कर सकते हैं। यह संहिता 29 पुराने श्रम कानूनों को प्रतिस्थापित करने वाली चार श्रम संहिताओं में से एक है, जिसका उद्देश्य श्रम क्षेत्र में सुधार और सरलीकरण लाना है।
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