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Delhi NCR News: नए अग्निशमन नियम, राहत के साथ आफत
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-राहत किसे और कितनी, इसका फैसला अधिकारियों के हाथ, अतिरिक्त सुरक्षा के नाम पर बढ़ी विवेकाधीन शक्ति
धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने हाल ही में आग से सुरक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। संशोधित नियमों में राजधानी की इमारतों, मकान मालिकों और निवासियों के लिए आग से बचाव के कई नए मानक तय किए गए हैं। हालांकि, नियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि तंग गलियों और पुरानी दिल्ली के विशेष इलाकों को राहत देने के लिए अधिकारियों को दिए गए व्यापक अधिकार भविष्य में मनमानी और भ्रष्टाचार की आशंका को जन्म दे सकते हैं।
नए नियमों के तहत तंग रास्तों और पुरानी दिल्ली के विशेष क्षेत्रों में पहले से बनी या निर्माणाधीन इमारतों को राहत देने का प्रावधान किया गया है। नियमों में कहा गया है कि सरकार लिखित कारण दर्ज कर आग से सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को शिथिल, रूपांतरित या निरस्त कर सकती है। हालांकि, यह छूट किन स्पष्ट मानकों के आधार पर दी जाएगी, इसे लेकर अभी कोई विस्तृत नियम सामने नहीं आया है। ऐसे में एक इमारत को छूट मिलने और उसके बगल की इमारत पर वही नियम सख्ती से लागू होने की स्थिति में समानता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
अतिरिक्त इंतजाम कराने का भी अधिकार
संशोधित प्रावधानों में दमकल विभाग के निदेशक को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम कराने का अधिकार भी दिया गया है। यदि निदेशक को लगता है कि किसी इमारत में अतिरिक्त अग्नि सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, तो वह उसके मालिक को ऐसे इंतजाम करने का निर्देश दे सकता है। सवाल यह है कि निर्धारित मानकों का पालन कर चुके भवन मालिकों पर भी अतिरिक्त उपकरण या सुरक्षा व्यवस्था लगाने की मांग किस आधार पर की जाएगी।
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लंबित आवेदनों पर पुराने नियम ही लागू होंगे
नए नियमों में मौजूदा आवेदनों के लिए भी एक अहम प्रावधान किया गया है। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि जिस तारीख से ये संशोधित नियम लागू होंगे, उस तारीख तक लंबित सभी आवेदनों का निपटारा उसी प्रावधान के तहत किया जाएगा, जो आवेदन दाखिल करने की तारीख को लागू था। यानी नए नियम लागू होने के बाद भी उस तारीख तक लंबित आवेदन पर नए प्रावधान पीछे की तारीख से लागू नहीं होंगे।
आग से बचाव के नए प्रमुख मानक
संशोधित नियमों में दमकल वाहनों की आवाजाही के लिए कम से कम छह मीटर चौड़ा रास्ता अनिवार्य किया गया है। आपातकालीन निकासी द्वारों को आग और धुएं से सुरक्षित रखने के लिए फायर चैक डोर और प्रेशराइजेशन प्रणाली का प्रावधान है।
बिजली कटने या धुएं के बीच निकासी मार्ग पहचानने के लिए रिफ्लेक्टिव टेप, फ्लोर नंबर और एग्जिट साइन लगाए जाएंगे। आपात स्थिति में जीवनरक्षक प्रणालियों के संचालन के लिए वैकल्पिक बिजली बैकअप भी जरूरी होगा। इसके अलावा सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के जरिए संकट के समय लोगों को सुरक्षित मार्ग की जानकारी देने की व्यवस्था करनी होगी।
हर इमारत में आग बुझाने के लिए समर्पित पानी का भंडारण टैंक रखना होगा। बहुमंजिला इमारतों में अग्निशमन टावर और फायर लिफ्ट का प्रावधान भी अनिवार्य किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य आग लगने की स्थिति में राहत और बचाव कार्य को प्रभावी बनाना है, लेकिन अधिकारियों को मिले व्यापक विवेकाधिकार को लेकर पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने हाल ही में आग से सुरक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। संशोधित नियमों में राजधानी की इमारतों, मकान मालिकों और निवासियों के लिए आग से बचाव के कई नए मानक तय किए गए हैं। हालांकि, नियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि तंग गलियों और पुरानी दिल्ली के विशेष इलाकों को राहत देने के लिए अधिकारियों को दिए गए व्यापक अधिकार भविष्य में मनमानी और भ्रष्टाचार की आशंका को जन्म दे सकते हैं।
नए नियमों के तहत तंग रास्तों और पुरानी दिल्ली के विशेष क्षेत्रों में पहले से बनी या निर्माणाधीन इमारतों को राहत देने का प्रावधान किया गया है। नियमों में कहा गया है कि सरकार लिखित कारण दर्ज कर आग से सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को शिथिल, रूपांतरित या निरस्त कर सकती है। हालांकि, यह छूट किन स्पष्ट मानकों के आधार पर दी जाएगी, इसे लेकर अभी कोई विस्तृत नियम सामने नहीं आया है। ऐसे में एक इमारत को छूट मिलने और उसके बगल की इमारत पर वही नियम सख्ती से लागू होने की स्थिति में समानता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
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अतिरिक्त इंतजाम कराने का भी अधिकार
संशोधित प्रावधानों में दमकल विभाग के निदेशक को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम कराने का अधिकार भी दिया गया है। यदि निदेशक को लगता है कि किसी इमारत में अतिरिक्त अग्नि सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, तो वह उसके मालिक को ऐसे इंतजाम करने का निर्देश दे सकता है। सवाल यह है कि निर्धारित मानकों का पालन कर चुके भवन मालिकों पर भी अतिरिक्त उपकरण या सुरक्षा व्यवस्था लगाने की मांग किस आधार पर की जाएगी।
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लंबित आवेदनों पर पुराने नियम ही लागू होंगे
नए नियमों में मौजूदा आवेदनों के लिए भी एक अहम प्रावधान किया गया है। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि जिस तारीख से ये संशोधित नियम लागू होंगे, उस तारीख तक लंबित सभी आवेदनों का निपटारा उसी प्रावधान के तहत किया जाएगा, जो आवेदन दाखिल करने की तारीख को लागू था। यानी नए नियम लागू होने के बाद भी उस तारीख तक लंबित आवेदन पर नए प्रावधान पीछे की तारीख से लागू नहीं होंगे।
आग से बचाव के नए प्रमुख मानक
संशोधित नियमों में दमकल वाहनों की आवाजाही के लिए कम से कम छह मीटर चौड़ा रास्ता अनिवार्य किया गया है। आपातकालीन निकासी द्वारों को आग और धुएं से सुरक्षित रखने के लिए फायर चैक डोर और प्रेशराइजेशन प्रणाली का प्रावधान है।
बिजली कटने या धुएं के बीच निकासी मार्ग पहचानने के लिए रिफ्लेक्टिव टेप, फ्लोर नंबर और एग्जिट साइन लगाए जाएंगे। आपात स्थिति में जीवनरक्षक प्रणालियों के संचालन के लिए वैकल्पिक बिजली बैकअप भी जरूरी होगा। इसके अलावा सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के जरिए संकट के समय लोगों को सुरक्षित मार्ग की जानकारी देने की व्यवस्था करनी होगी।
हर इमारत में आग बुझाने के लिए समर्पित पानी का भंडारण टैंक रखना होगा। बहुमंजिला इमारतों में अग्निशमन टावर और फायर लिफ्ट का प्रावधान भी अनिवार्य किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य आग लगने की स्थिति में राहत और बचाव कार्य को प्रभावी बनाना है, लेकिन अधिकारियों को मिले व्यापक विवेकाधिकार को लेकर पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं।