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अगले महीने से लागू हो जाएगी नई शिक्षा नीति, आधा हो जाएगा कोर्स
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 27 Sep 2018 10:16 PM IST
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प्रकाश जावड़ेकर
- फोटो : PTI
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शिक्षा का मकसद सिर्फ रोजगार से जोड़ना नहीं है। शिक्षा के माध्यम से अच्छा इंसान व नागरिक बनाना भी शामिल है। इसलिए नई शिक्षा नीति में स्किल डेवलेपमेंट, टेक्नोलॉजी से जोड़ने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों व शारीरिक शिक्षा को भी पढ़ाया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का जीरो ड्रॉफ्ट तैयार हो चुका है और अक्टूबर के अंत तक सरकार के पास पहुंच जाएगा। इसके बाद नई शिक्षा नीति राष्ट्र को समर्पित होगी।
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जावडेकर ने कहा कि नई शिक्षा नीति से 2020 से 2040 तक गांवों और शहरों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार दिखेगा। स्कूली शिक्षा में सुधार दिखने लगा है, जबकि विश्वविद्यालयों में शुरू हो रहा है। पहली बार अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की परीक्षा में बदलाव, मार्केट की डिमांड के आधार पर नया पाठ्यक्रम तैयार करना शामिल है। यूजीसी की कमेटी इस पर काम कर रही हैं। विश्वविद्यालय यदि स्वयं बदलाव चाहते होंगे तो वे स्वतंत्र हैं।
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इसके अलावा बीए, बीकॉम और बीएससी की सामान्य डिग्री के साथ-साथ अब बीए, बीकॉम और बीएससी में प्रोफेश्नल डिग्री लाने जा रही है। सामान्य डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई से रोजगार संभव नहीं है, इसलिए मार्केट के आधार पर प्रोफेशनल कोर्स से रोजगार बढ़ाने पर काम होगा।
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वेदों के साथ कंप्यूटर, गणित और साइंस की पढ़ाई
जावडेकर ने कहा कि वेद विद्यालयों में अब छात्र वैदिक शास्त्र के साथ-साथ कंप्यूटर, गणित, साइंस, अंग्रेजी, समाज विज्ञान, संस्कृत विषय की पढ़ाई भी करेंगे। दुनिया के 45 देशों में वेदों की पढ़ाई व रिसर्च हो रही है। इसलिए वेदों की पढ़ाई के साथ अन्य विषयों की जानकारी होनी भी जरूरी है। यूनेस्को ने वेद को वैश्विक धरोहर माना है, इसलिए वेदों के साथ-साथ अन्य भाषाओं की भी जानकारी होनी चाहिए।