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महिलाओं को सशक्त बनाएंगे नए कानून: वकील बोले- अपराध कम होंगे, देश की न्यायिक व्यवस्था होगी ज्यादा मजबूत

Mon, 01 Jul 2024 10:07 AM IST
अनुज कुमार नितिन राजपूत, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 01 Jul 2024 10:07 AM IST
सार

देश में एक जुलाई से तीन नए कानून लागू हो गए हैं। अब आईपीसी नहीं बल्कि बीएनएस एक्ट के तहत आरोपियों पर कार्रवाई होगी। वकालत कर रहे अनुग्रह द्विवेदी ने बताया कि नए कानूनों से देश में अपराध कम होंगे और न्यायिक व्यवस्था ज्यादा मजबूत होगी।

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New Criminal Laws lawyer said crimes will reduce and judicial system of country will be stronger
कोर्ट रूम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

पटियाला हाउस कोर्ट में वकालत कर रहे अनुग्रह द्विवेदी ने बताया कि नए कानूनों से देश में अपराध कम होंगे और न्यायिक व्यवस्था ज्यादा मजबूत होगी। अब महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना क्रूरता माना जाएगा। बीएनएस में धारा 86 के अंतर्गत परिभाषित है। 
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किसी महिला को आत्महत्या करने के लिए उकसाने के लिए कार्रवाई होगी। अगर महिला को चोट पहुंचाई जाती है या जीवन को खतरे में डाला जाता है, तो दोषी को तीन साल की सजा का प्रावधान है। केंद्र सरकार ने इसके अलावा एक नया सेक्शन भी जोड़ा हैं, जिसमें यौन उत्पीड़न से बचे व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी पहचान उजागर करने वाले व्यक्ति के लिए सजा निर्धारित की गई है। 
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महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लोग गंभीर तरीके से नहीं लेते थे, लेकिन अब लोग गंभीर तरीके से लेंगे। वहीं, तीस हजारी कोर्ट के वकील मनीष शर्मा ने बताया कि आईपीसी की धारा 498 को बीएनएस की धारा 85 और 86 में परिवर्तित करना देश के कानूनी ढांचे में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है, विशेष रूप से घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में।
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इसके अलावा अदालत की अनुमति के बिना मीडिया में धोखे से यौन संबंध बनाने, सामूहिक दुष्कर्म और बार-बार अपराध करने वालों को सजा देने से संबंधित अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर रोक लगाता है। अदालती कार्यवाही से यौन उत्पीड़न से पीड़ित की पहचान बिना अनुमति के उजागर करने पर दो साल की सजा हो सकती है।

आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा बढ़ाई
सुप्रीम कोर्ट की वकील मनीषा अग्रवाल ने बताया कि धोखाधड़ी, जो पहले धारा 420 और कुछ अन्य धाराओं के अंतर्गत आती थी, अब बीएनएस की धारा 318 के अंतर्गत प्रदान की गई है। धोखाधड़ी के लिए सजा को बढ़ाकर कारावास कर दिया गया है, जिसे आईपीसी के तहत एक साल की जगह तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है।

बीएनएस में अब संपत्ति के बेईमानी से दुरुपयोग के लिए कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा भी बढ़ा दी गई है। इससे ड्रग्स, चिट-फंड घोटाले, गेमिंग घोटाले जैसे अपराधों में कमी आएगी। जल्दबाजी और लापरवाही से मौत का कारण बनने पर सजा को बढ़ाकर कारावास कर दिया गया है, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब सड़क दुर्घटना कर भागने वाले शख्स को ज्यादा सजा मिलेगी। बीएनएस यह भी कहता है कि जहां पांच या अधिक लोगों का समूह एक साथ मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान    आधार पर हत्या करता है तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को  दंडित किया जाएगा।

नागरिकों को सशक्त बनाएंगे नए कानून
तीस हजारी कोर्ट के वकील कुणाल ढाकला ने बताया कि देश की व्यवस्था के अनुसार नए कानूनों को रचा गया है, जो समाज को आवश्यकता अनुसार प्रक्रिया और व्यवस्था देंगे। नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन कानूनों का उद्देश्य सभी के लिए अधिक सुलभ, सहायक और प्रभावी न्याय प्रणाली बनाना है। इससे जांच और न्यायिक व्यवस्था का चेहरा बदल जाएगा। अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से समन की तामील की जा सकेगी। इससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। कागजी कार्रवाई भी कम होगी।

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