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आपः मौजूदा और नई योजना के खर्च के लिए पैसा जुटाना नई चुनौती

Thu, 13 Feb 2020 04:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 13 Feb 2020 04:17 AM IST
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New challenge to raise money for existing and new scheme in delhi 
दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अरविंद केजरीवाल - फोटो : PTI

आदमी पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली में प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया लेकिन उसके सामने अपने चुनावी वादों और पहले से किए जा रहे कार्यों के लिए पैसा जुटाने की बड़ी चुनौती होगी। अन्य राज्य सरकारों के मुकाबले सबसे कम राजकोषीय घाटे के बावजूद आप जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना आसान नहीं होगा।

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योजनाएं और कदम जिनके लिए चाहिए होगा अधिक पैसा
- बिजली की 200 यूनिट फ्री और 400 यूनिट तक उपभोग पर सब्सिडी, जिसमें 535 करोड़ से अधिक खर्च का अनुमान
- महानगरों में सबसे कम बिजली दर बरकरार रखने की चुनौती
- 20 हजार लीटर से कम पानी उपभोग पर बिल माफी, यहां 400 करोड़ खर्च का आकलन
- विद्यार्थियों को 10 लाख रुपये का लोन
- 200 मोहल्ला क्लीनिक में निशुल्क इलाज, दवा व जांच
- सड़क व आग हादसों में सरकार द्वारा उठाया जा रहा इलाज का खर्च
- बसों में महिलाओं को निशुल्क यात्रा के लिए 350 करोड़ की जरूरत
- शहर में 11 हजार वाईफाई हॉटस्पॉट लगाने के लिए 550 करोड़ का निवेश
- स्कूली शिक्षकों, आंगनबागड़ी व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं आदि के वेतन व मानदेय में वृद्धि

शिक्षा-स्वास्थ्य: कोर सेक्टर में बढ़ाया निवेश

सितंबर 2019 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार का शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजट देश केे औसत से कहीं अधिक है। खासतौर से आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद 2015 से इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। इसका फायदा आम नागरिकों को मिला भी है।

शिक्षा
वित्त वर्ष - दिल्ली सरकार - देश का औसत
2009-10 - 16.3 - 15.3
2011-12 - 18 - 16.3
2013-14 - 18.1 - 16.5
आप सरकार में
2015-16 - 21.8 - 15.3
2017-18 - 25.3 - 15
2019-20 - 24.3 - 14.8

चिकित्सा, जनस्वास्थ्य और परिवार कल्याण
वित्त वर्ष - दिल्ली सरकार - देश का औसत
2009-10 - 8 - 4.2
2011-12 - 9.9 - 4.2
2013-14 - 8.7 - 4.4
आप सरकार में
2015-16 - 10.3 - 4.7
2017-18 - 11.6 - 5
2019-20 - 12.5 - 4.9
स्रोत : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

 
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खुद के अर्जित राजस्व घटे, इसलिए भी चिंता

2017-18 में दिल्ली एनसीटी द्वारा 35717.02 करोड़ रुपये खुद से टैक्स द्वारा अर्जित किए गए थे। वहीं अगले वर्ष यह 38400 करोड़ रहे, जबकि बजट अनुमान 42000 करोड़ का था। अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ इसे चिंता का विषय मान रहे हैं। 2015-16 में यह जीएसडीपी (ग्रॉस स्टेट डॉमेस्टिक प्रोडक्ट) का 5.49 प्रतिशत था, लेकिन 2018-19 में घटकर 4.93 प्रतिशत रह गया । हालांकि जीएसटी आने के बाद भी इसका मुआवजा मिल रहा है, इसलिए फिलहाल कुल राजस्व पर इसका नुकसान महसूस नहीं हो रहा है, लेकिन अगर सरकार खर्च बढ़ाने का सोचती है तो यह कमी उसे चोट पहुंचा सकती है।

नया निवेश भी बढ़ रहा
आप सरकार की नीतियों में नया निवेश बढ़ाना शामिल रहा है। यह समाज के लिए अच्छा संकेत है, लेकिन आय बढ़ाए बिना खर्च बढ़ाने की बात कोई भी सही नहीं मान सकता। नए स्कूल और अस्पतालों के निर्माण, बड़ी आबादी की जरूरतें पूरी करने के लिए जरूरी है, लेकिन आय बढ़ाने के रास्ते भी सरकार को निकालने होंगे।

उम्मीद: राजस्व ज्यादा, राजकोषीय घाटा कम
2019-20 के अनुमान में दिल्ली सरकार का रेवेन्यू बैलेंस प्रदेश के जीएसडीपी के 0.6 प्रतिशत ज्यादा है, यानी सरप्लस चल रहा है। बीते एक दशक से इसमें लगातार गिरावट आती जा रही है। आरबीआई के अनुसार 2010-11 में यह 4.2 प्रतिशत प्लस था। आप सरकार आने के बाद भी यह 1.6 प्रतिशत के स्तर से नीचे गिरता रहा है। यह प्रदेश की आर्थिक स्थिति के गिरते जाने का संकेत हैं, लेकिन अब भी इसे उ मीद की किरण माना जा सकता है। वहीं देश में सबसे कम राजकोषीय घाटा भी दिल्ली का है। आरबीआई के अनुसार 2019-20 में दिल्ली के लिए यह घाटा एक प्रतिशत से कम रहा, जो किसी और प्रदेश या केंद्र शासित क्षेत्र में नहीं था।

दिल्ली का राजस्व संतुलन बेहतर
वित्त वर्ष - दिल्ली - देश का औसत
2009-10 - 3 - -0.51
2012-13 - 1.3 - -0.3
2015-16 - 1.6 - -.04
2016-17 - 0.9 - -2
2017-18 - 0.7 - -0.35
2018-19 - -0.6 - -0.1
2019-20 - -0.6 - -0

राजकोषीय घाटा
वित्त वर्ष - दिल्ली - देश का औसत
2009-10 - -1.63 - 3.09
2012-13 - -0.58 - -1.97
2015-16 - 0.24 - -3.05
2016-17 - -0.17 - -3.5
2017-18 - 0.02 - -2.4
2018-19 - -0.4 - -2.9
2019-20 - -0.7 - -2.6

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