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पहली बार पर्दे पर दिखेगी एसिड पीड़िता की कहानी

Tue, 09 Sep 2014 06:04 PM IST
Updated Tue, 09 Sep 2014 06:04 PM IST
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'New Born', film on acid attack survivors in toronto international film festival.

2005 की एसिड अटैक की घटना ने नरसिन जहां को पूरी तरह से डरा कर रख दिया था। उसके चेहरे पर लगा नकाब उसे उस बुरे दिन की बार-बार याद दिलाता है। लेकिन पटकथा लेखिका मेघा रामास्वामी की लघु फिल्म 'न्यू बॉर्न' में, नरसिन ने पहली बार अपना नकाब हटा कर कैमरे के सामने खुलकर बात की।

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उसने अटैक होने तक और उसके बाद के डर को बयां किया। मेघा ने कहा कि मेरे बिना कहे ही उसने अपना नकाब खोलकर आराम से बात की। आठ मिनट की  इस फिल्म का प्रसारण नौ सितंबर को टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में शॉर्ट कट इंटरनेशल प्रोग्राम के अंर्तगत किया जायेगा। इस साल विश्व की आठ फिल्मों में मेघा की फिल्म सबसे अलग है, जिसमें भारत में एसिड अटैक के बाद पीड़ित कैसे अपनी संघर्ष पूर्ण जीवन को सामान्य तरीके से जीते है बताया गया है।
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मेघा ने कहा कि न्यू बॉर्न कोई फिल्म प्रोजेक्ट नहीं है और न ही लोग इसे फिल्म की तरह लें, मैं खाली थी और कोई फिल्म नहीं करना चाहती थी। तो मैनें देश में एसिड अटैक से मिलता जुलते होने वाले हमलों के बारे में रिसर्च करना शुरू किया और इस बीच मुझे एक साथी मिल गयी जो इस घटना से जूझ चुकी थी, जहां उसे सनसनीखेज बातें पता चली।

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समाज इन पीड़‌िताओं के साथ करता है दुर्व्यवहार

'New Born', film on acid attack survivors in toronto international film festival.

मेघा ने कहा कि वह सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई की स्टाफ नर्स प्रीति राठी से हुईं हैं, जिस पर पिछले साल एसिड अटैक हुआ था। उसने एक स्वयंसेवक की तरह एसिड अटैक रोक अभियान शुरू कर, पीड़ितों की दर्दनाक कहानी सुनी।

‌फिल्म की शुरूआत पीड़ित की दर्द भरी कविता से की गयी है, जिसमें कहा गया है कि समाज में उनके साथ कितना बुरा व्यवहार किया जाता है। कुछ लोग तो पीड़ितों को बस अड्डे पर घुरते भी हैं, लेकिन कुछ पीड़ित ऐसे भी हैं जो लोगों की बातों को परे कर अपनी जिंदगी में आगे बढते हैं जैसे एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी जो कैमरे के सामने खुलकर बालीवुड गाने पर अपने अपार्टमेंट में नाचती है और दुसरी ओर नरसिन एक रेस्त्रा में सूप पी रही है। देखें ‌फ‌िल्म का ट्रेलर।


फिल्म को उन सारे कामों से जोड़ा गया है जिसे मेघा ने पीड़‌ितों के साथ रहते हुए किया है। यह बड़ा बुरा अनुभव है। जब आप सब कुछ खो बैठे हो तो इच्छाएं भी मर जाती है। मेघा ने कहा कि वे‌ सिर्फ बात करना चाहती है न कि किसी और के द्वारा उनकी जीवनी प्रस्तुत करना चाहती है।

मेघा ने सिर्फ तीन पीङितों की जीवनी को शॉर्ट फिल्म में प्रस्तुत किया है। फिल्म का अब तक का बन तैयार हो चुका हिस्सा मेघा ने रिसाईकिलवाला लैब्स और फिल्म निर्माता आनंद गांधी की मदद से बनाई है। मेघा ने बताया कि पूरी फिल्म में 12 पीड़ितों की कहानी पर आधारित होगी। मेघा अब तक 29-30 एसिड अटैक में सर्वाइव करने वालों से मिल चुकी हैं।

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