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Delhi NCR News: जेलों में वसूली रैकेट का साइबर ठगों जैसा नेटवर्क उजागर
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एसीबी को 200 संदिग्ध बैंक खाते मिले, कैदियों के परिजनों से वसूली रकम कई खातों के जरिए छिपाई जाती थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की जेलों में सुरक्षा और विशेष सुविधाएं दिलाने के नाम पर चल रहे वसूली रैकेट की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को करीब 200 ऐसे बैंक खातों का पता चला है, जिनके माध्यम से कैदियों के परिजनों से वसूली गई रकम का ट्रेल छिपाया जाता था। एजेंसी अब इन खातों के लेनदेन की जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरोह सीधे अपने बैंक खातों में रकम नहीं मंगवाता था। इसके बजाय जेल अधिकारियों के परिचितों, रिश्तेदारों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर खुलवाए गए खातों और कुछ वकीलों व उनके परिचितों के खातों का इस्तेमाल किया जाता था। अलग-अलग खातों में रकम पहुंचने के बाद उसे नकद निकालकर गिरोह के सदस्यों में बांट दिया जाता था।
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि कई जेल अधिकारियों ने पांच-छह वैकल्पिक बैंक खातों की व्यवस्था कर रखी थी, ताकि किसी एक खाते पर संदेह न हो। एक अधिकारी से जुड़े खातों में ही सालाना 40 से 50 लाख रुपये तक के संदिग्ध लेनदेन के संकेत मिले हैं। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके जरिए अब तक कितनी रकम की उगाही की गई।
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इस मामले में एसीबी अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जेल अधिकारी, वार्डर, वकील और बाहरी लोग शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया था कि विचाराधीन कैदियों के परिजनों से सुरक्षा और विशेष सुविधाओं का लालच देकर अवैध वसूली की जाती थी। अब बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से पूरे रैकेट की वित्तीय परतें खुल रही हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की जेलों में सुरक्षा और विशेष सुविधाएं दिलाने के नाम पर चल रहे वसूली रैकेट की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को करीब 200 ऐसे बैंक खातों का पता चला है, जिनके माध्यम से कैदियों के परिजनों से वसूली गई रकम का ट्रेल छिपाया जाता था। एजेंसी अब इन खातों के लेनदेन की जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरोह सीधे अपने बैंक खातों में रकम नहीं मंगवाता था। इसके बजाय जेल अधिकारियों के परिचितों, रिश्तेदारों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर खुलवाए गए खातों और कुछ वकीलों व उनके परिचितों के खातों का इस्तेमाल किया जाता था। अलग-अलग खातों में रकम पहुंचने के बाद उसे नकद निकालकर गिरोह के सदस्यों में बांट दिया जाता था।
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एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि कई जेल अधिकारियों ने पांच-छह वैकल्पिक बैंक खातों की व्यवस्था कर रखी थी, ताकि किसी एक खाते पर संदेह न हो। एक अधिकारी से जुड़े खातों में ही सालाना 40 से 50 लाख रुपये तक के संदिग्ध लेनदेन के संकेत मिले हैं। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके जरिए अब तक कितनी रकम की उगाही की गई।
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इस मामले में एसीबी अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जेल अधिकारी, वार्डर, वकील और बाहरी लोग शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया था कि विचाराधीन कैदियों के परिजनों से सुरक्षा और विशेष सुविधाओं का लालच देकर अवैध वसूली की जाती थी। अब बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से पूरे रैकेट की वित्तीय परतें खुल रही हैं।