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मुश्किल पलों में मोदी के साथ से खुश हैं नेपाली

Wed, 29 Apr 2015 09:18 AM IST
Updated Wed, 29 Apr 2015 09:18 AM IST
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Nepali people are glad with pm modi

कहते हैं मुश्किल घड़ी में पड़ोसी ही सबसे पहले काम आता है, इस पुरानी कहावत को मोदी सरकार ने साबित कर दिया है, क्योंकि नेपाल में भूकंप त्रासदी के बाद दर्द से उबरने के लिए भारत ने कंधा ही नहीं दिया, बल्कि आपदा पीड़ितों की मदद के सारे दरवाजे खोल दिए।

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आपदा में भारत की मदद से नेपाली समुदाय मोदी का मुरीद हो गया है। विश्वविद्यालयों, बाजारों से लेकर सोशल मीडिया में मोदी की तारीफें हो रही हैं।

नेपाल में भूकंप के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदद की घोषणा के साथ कुछ घंटों में ही आपदा प्रबंधन समेत वायु सेना को रवाना कर दिया था। इसके साथ ही मेडिकल टीम व खाने-पीने का आइटम भी पहुंचा दिए।
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'मुश्किल वक्त में अपने-पराए का पता चलता है'

Nepali people are glad with pm modi

नेपाल को दर्द में संभालने के लिए भारत ने जो कदम उठाया, उसकी सोशल मीडिया में जमकर तारीफ हो रही है। यूजर्स का कहना है कि जिस तेजी ने भारत ने  मदद के हाथ बढ़ाए, उससे पड़ोसी देशों के साथ व्यवहारिक रिश्ते दोस्ताना में बदल गए हैं, जोकि एक अच्छी शुरुआत है।

मुश्किल घड़ी में हर किसी को अपने और परायों का पता चलता है। खास बात यह है कि मोदी मुरीद में तारीफ करने वालों में विरोधी खेमा भी शामिल है।

उधर नेपाली मूल के छात्र भी भारत की मेहमान नबाजी के कायल हो गए हैं। उच्च शिक्षा के लिए नेपाली छात्रों की पहली पसंद भारत होता है,ऐसे में करीब हजारों छात्र देश केविभिन्न राज्यों में पढ़ रहे हैं।

दिल्ली में ही करीब दो हजार से अधिक छात्र जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, अंबेडकर विश्वविद्यालय, डीयू, आईपीयू, जामिया समेत डीटीयू में पढ़ रहे हैं।

इसके अलावा आईसीसीआर के तहत भारत सरकार की विशेष स्कॉलरशिप के तहत भी सैकड़ों छात्र भारत में तकनीकी, मैनेजमेंट समेत मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।

घर वाले सुरक्षित, सांस मिली

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शनिवार को भूकंप के बाद रविवार को घरवालों की कुशल मंगल होने का समाचार मिला था। हालांकि नुकसान तो नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी तीन दिनों से परिवार खुले मैदान में बारिश में समय काट रहा है। नौकरी जरूरी है, इसलिए घर नहीं जा सकता हूं। हालांकि भारत की मदद से उम्मीद है कि जिंदगी पटरी पर जल्द आ जाएगी।
रामू, नौकरीपेशा, नेपाल

परिजनों से बात करके मिली राहत
एक दिन के बाद परिजनों से बात कर पायी हूं, हालांकि उनकी सलामती से राहत की सांस मिली है। भारत में रहकर एक पल भी ऐसा नहीं लगा कि हम नेपाल से बाहर हैं। विश्वविद्यालय भी हमारी मदद के लिए आगे बढ़ा था।
अंकिता, छात्रा, मास्टर ऑफ सोशल वर्क, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नेपाल

मोदी ने पड़ोसी संग दोस्ती के नए रिश्ते का दिया संदेश
मोदी सरकार ने आपदा की घड़ी में नेपालियों का जिस गर्मजोशी से साथ दिया, उसकी दुनिया कायल हो गयी है। क्योंकि कोई पड़ोसी देश ऐसे मदद के लिए नहीं बढ़ा, जैसे भारत। उन्होंने मुश्किल घड़ी में साथ देने के अलावा दोस्ती का भी संदेश दिया है।-सुदिष्ठ, पीएचडी, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय

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