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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: दिव्यांगों के सपनों को उड़ान देने के लिए छोड़ दी मॉडलिंग, अब इन चेहरों पर मुस्कान लाने को बना लिया लक्ष्य

Mon, 08 Mar 2021 04:24 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 08 Mar 2021 04:24 PM IST
सार

नेहा का कहना है- 'सामान्य तौर पर लोगों में यह सोच होती है कि दिव्यांग व्यक्ति अक्षम होते हैं और वे कोई कार्य आसानी से नहीं कर सकते। लेकिन सच्चाई इसके उलट है। अनेक दिव्यांग विशिष्ट प्रतिभा के धनी होते हैं।'

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Neha Foundation Chairperson Neha Shalini Dua said she quit his modelling career and start service for divyangjan
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दिव्यांगजनों को पुरस्कृत करते भाजपा नेता श्याम जाजू, नेहा शालिनी दुआ और अन्य - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

महिलाओं के बारे में अकसर यह कहा जाता है कि उन्होंने अपने पति, बच्चों या परिवार के लिए अपना करियर त्याग दिया, लेकिन इस समाज में ऐसी महिलाएं भी मौजूद हैं, जिन्होंने अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि समाज के एक वर्ग विशेष के लिए अपना करियर छोड़ दिया। नेहा शालिनी दुआ एक ऐसी ही महिला हैं जिन्होंने अपना प्रोफेशनल मॉडलिंग का करियर छोड़ दिव्यांग चेहरों पर मुस्कान लाने को ही अपनी जिंदगी का उद्देश्य बना लिया। आज वे इन्हीं बच्चों के लिए काम करती हैं और उनके कामों को दुनिया में लोगों के सामने लाने की कोशिश करती हैं।

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नेहा फाउंडेशन की चेयरपर्सन नेहा शालिनी दुआ ने बताया कि वे एक सफल मॉडल के रूप में काम करती थीं। इसके लिए उन्हें विभिन्न कार्यक्रम करने पड़ते थे। इसी तरह के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए काम करने का अवसर मिला और उन्होंने देखा कि एक दिव्यांगों की दुनिया सामान्य लोगों से कितनी अलग होती है। चंद कदमों की दूरी एक दिव्यांग व्यक्ति के लिए कितनी बड़ी लंबी बन जाती है कि उस तक पहुंचने के लिए उसे अनेक अंजान बाधाओं को पार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस सच्चाई से रूबरू होने के बाद उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए काम करने को ही अपनी जिन्दगी का लक्ष्य बना लिया।

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बेहद प्रतिभाशाली होते हैं दिव्यांग

नेहा शालिनी दुआ ने बताया कि सामान्य तौर पर लोगों में यह सोच होती है कि दिव्यांग व्यक्ति अक्षम होते हैं और वे कोई कार्य आसानी से नहीं कर सकते। लेकिन सच्चाई इसके उलट है। अनेक दिव्यांग विशिष्ट प्रतिभा के धनी होते हैं और उनके क्षेत्र में मुकाबला करना उन लोगों के लिए भी संभव नहीं है जो कथित तौर पर स्वयं को सामान्य समझते हैं।

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उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह है कि अगर हम किसी को दिव्यांग समझते हैं तो यह स्वयं हमारे मन और विचार की दिव्यांगता है। हर व्यक्ति हर कार्य करने में सक्षम नहीं होता। इस दृष्टि से कई कार्य सभी लोग नहीं कर सकते, ठीक उसी प्रकार से ये दिव्यांग लोग भी कुछ कार्य नहीं कर सकते। लेकिन इसकी वजह से उन्हें पूरी तरह अक्षम मान लेना वैचारिक दिव्यांगता के आलावा और कुछ नहीं कही जा सकती।

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