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बच्चों की जरूरत बने नेबुलाइजर, 60 फीसदी बढ़ी मांग : सर्वे
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-वायु प्रदूषण के चलते बढ़ गई है यह मांग, उत्तरी दिल्ली में ही कुछ इनहेलर की बिक्री में लगभग 40 प्रतिशत बढ़ोतरी
-सेंट्रल और साउथ दिल्ली के आउटलेट्स में नेबुलाइजर की डिमांड में 50 से 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
वायु प्रदूषण और सर्दी के महीने में बच्चों के लिए नेबुलाइजर, इनहेलर और सांस की दवाओं की डिमांड में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसका खुलासा एक सर्वे में हुआ है। इसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण के चलते इनकी डिमांड में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, सभी नेबुलाइजर खरीद में से लगभग एक-तिहाई बच्चों के लिए थे, जो बिगड़ती हवा की क्वालिटी के बीच कम उम्र के लोगों में बढ़ती सांस की तकलीफ को दिखाता है। यह सर्वे पिछले साल वॉरियर मॉम्स ने दक्षिण, पूर्व, उत्तर और सेंट्रल दिल्ली के केमिस्टों के साथ मिलकर किया था और इस साल ज्यादा फार्मासिस्टों के साथ इसे फिर से किया गया।
केमिस्टों ने बताया कि नवंबर और जनवरी के बीच, जब प्रदूषण का स्तर आमतौर पर सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा सर्वे में बताया गया कि माता-पिता अक्सर बच्चों में लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत और सीने में जकड़न जैसे लक्षणों की शिकायत करते थे और कई केमिस्टों ने बताया कि ये समस्याएं ज्यादा स्मॉग वाले दिनों में, खासकर सुबह और शाम के समय और भी बढ़ जाती थीं।
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-सेंट्रल और साउथ दिल्ली के आउटलेट्स में नेबुलाइजर की डिमांड में 50 से 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
वायु प्रदूषण और सर्दी के महीने में बच्चों के लिए नेबुलाइजर, इनहेलर और सांस की दवाओं की डिमांड में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसका खुलासा एक सर्वे में हुआ है। इसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण के चलते इनकी डिमांड में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, सभी नेबुलाइजर खरीद में से लगभग एक-तिहाई बच्चों के लिए थे, जो बिगड़ती हवा की क्वालिटी के बीच कम उम्र के लोगों में बढ़ती सांस की तकलीफ को दिखाता है। यह सर्वे पिछले साल वॉरियर मॉम्स ने दक्षिण, पूर्व, उत्तर और सेंट्रल दिल्ली के केमिस्टों के साथ मिलकर किया था और इस साल ज्यादा फार्मासिस्टों के साथ इसे फिर से किया गया।
केमिस्टों ने बताया कि नवंबर और जनवरी के बीच, जब प्रदूषण का स्तर आमतौर पर सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा सर्वे में बताया गया कि माता-पिता अक्सर बच्चों में लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत और सीने में जकड़न जैसे लक्षणों की शिकायत करते थे और कई केमिस्टों ने बताया कि ये समस्याएं ज्यादा स्मॉग वाले दिनों में, खासकर सुबह और शाम के समय और भी बढ़ जाती थीं।
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