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NCR में गहराएगा जबरदस्त बिजली संकट
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 09 Feb 2014 11:06 AM IST
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एनसीआर को प्लानिंग बोर्ड ने तगड़ा झटका दिया है। पावर कारपोरेशन के 1242 करोड़ के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की सेंट्रल कमेटी ने लोन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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यूपी सरकार की गारंटी के बावजूद कारपोरेशन को कामर्शियल संस्था मानते हुए एनसीआर डेवलपमेंट प्लान 2030 से बाहर कर दिया गया है। बोर्ड से मिलने वाली रकम से 144 बिजलीघर बनाए जाने थे, जिससे यहां 24 घंटे सप्लाई देने का रास्ता साफ होता।
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एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने डेवलपमेंट प्लान 2030 बनाया था। इसमें 2500 करोड़ से पावर स्ट्रक्चर खड़ा किया जाना था। इस धनराशि को ज्यादा मानते हुए यूपी सरकार ने डेवलपमेंट प्लान 2022 तैयार किया।
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इसके लिए 1242 करोड़ रुपये की जरूरत थी। प्लानिंग बोर्ड ने इस धनराशि को लोन के रूप में देने के लिए सरकार की गारंटी मांगी थी। राज्य सरकार ने इसकी गारंटी बोर्ड को भेज दी थी।
यह होने थे काम
एनसीआर के छह जिलों में 33 केवीए के 144 बिजलीघरों का निर्माण होना था। इनमें गाजियाबाद में 35, हापुड़ में 50, बुलंदशहर में 21, गौतमबुद्धनगर में 15, बागपत में 7 और मेरठ में 16 बिजलीघरों के साथ इनके लिए लाइन भी तैयार की जानी थी। अब योजना तैयार हुई तो प्लानिंग बोर्ड ने लोन देने से इंकार कर दिया।
यहां पहले ही बिजली संकट
बिजली की भारी किल्लत है। ज्यादातर बिजलीघर ओवरलोड चल रहे हैं। गर्मी में बिजली की जरूरत 16 हजार मेगावाट पहुंच जाती है, जबकि उपलब्धता मात्र 1150 मेगावाट है। ओवरलोड संसाधनों के चलते ट्रिपिंग और लो वोल्टेज का सामना करना पड़ता है।
यह आई समस्या
प्लानिंग बोर्ड ने पावर कारपोरेशन को कामर्शियल मानते हुए धनराशि देने से इंकार किया था। कारपोरेशन बोर्ड और शासन ने इसके कामर्शियल न होने की लिखित रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें मुनाफे के लिए काम न करने वाली संस्था बताया गया था। इसके बावजूद एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की सेंट्रल कमेटी ने इसको स्वीकार नहीं किया।