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राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पोती ने की सीएम से गुहार
संदीप वर्मा/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Sun, 26 Mar 2017 12:04 AM IST
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योगी आदित्यनाथ
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राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पौत्री जीबीयू में नौकरी (संविदा पर एसोसिएट प्रोफेसर) के लिए हुए भेदभाव पर कई माह से न्याय की गुहार लगा रही है। अब उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को लिखित शिकायत भेजी है।
मूलरूप से झांसी के चिरगांव निवासी अंजना सोलंकी ने बताया है कि उन्होंने प्रबंधन बोर्ड के आमंत्रण पर 27 जुलाई 2010 को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एंप्लाइड साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था।
कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व वह बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थी। उस वक्त बीआईईटी में छठा वेतनमान लागू नहीं किया गया था जबकि जीबीयू में इसे लागू कर दिया गया था।
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उनका आरोप है कि तत्कालीन कुलपति ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बीआईईटी में छठा वेतनमान लागू होने पर उन्हें प्रोफेसर पदनाम और वेतनमान लागू कर नियमित कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि प्रत्येक वर्ष उनका कार्यकाल बढ़ाया गया लेकिन 30 सितंबर वर्ष 2016 को उन्हें देर रात उनकी सेवाएं समाप्त करने का एक नोटिस पहुंचाया गया।
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मूलरूप से झांसी के चिरगांव निवासी अंजना सोलंकी ने बताया है कि उन्होंने प्रबंधन बोर्ड के आमंत्रण पर 27 जुलाई 2010 को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड एंप्लाइड साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था।
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कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व वह बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थी। उस वक्त बीआईईटी में छठा वेतनमान लागू नहीं किया गया था जबकि जीबीयू में इसे लागू कर दिया गया था।
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उनका आरोप है कि तत्कालीन कुलपति ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बीआईईटी में छठा वेतनमान लागू होने पर उन्हें प्रोफेसर पदनाम और वेतनमान लागू कर नियमित कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि प्रत्येक वर्ष उनका कार्यकाल बढ़ाया गया लेकिन 30 सितंबर वर्ष 2016 को उन्हें देर रात उनकी सेवाएं समाप्त करने का एक नोटिस पहुंचाया गया।
कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया
योगी आदित्यनाथ
जबकि, उनका कार्यकाल 26 जुलाई 2016 से 26 जुलाई 2017 तक था। उनका आरोप है कि इससे पूर्व ही उन्होंने बीआईईटी में वीआरएस के लिए आवेदन करने की जानकारी विवि को दी है। वहीं, उसके बाद से उन्होंने कई बार उप कुलपति से मुलाकात कर आदेश को निरस्त करने की गुहार लगाई। जिसपर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया है कि इस प्रकरण से वह आहत हैं। उन्होंने परेशान होकर पिछले बुधवार को विवि के कुलपति और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ समेत प्रशासनिक अधिकारियों और बोर्ड के सदस्यों के सामने न्याय की गुहार लगाई है।
एसोसिएट प्रोफेसर अंजना सोलंकी बीआईईटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। इनकी नियुक्ति जीबीयू में नहीं थी। 30 सितंबर 2016 को प्रोफेसर का एक वर्ष तक का कार्यकाल समाप्त हो गया था। जिसके बाद से उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। -मनोज राय, रजिस्ट्रार जीबीयू
उन्होंने आरोप लगाया है कि इस प्रकरण से वह आहत हैं। उन्होंने परेशान होकर पिछले बुधवार को विवि के कुलपति और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ समेत प्रशासनिक अधिकारियों और बोर्ड के सदस्यों के सामने न्याय की गुहार लगाई है।
एसोसिएट प्रोफेसर अंजना सोलंकी बीआईईटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। इनकी नियुक्ति जीबीयू में नहीं थी। 30 सितंबर 2016 को प्रोफेसर का एक वर्ष तक का कार्यकाल समाप्त हो गया था। जिसके बाद से उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। -मनोज राय, रजिस्ट्रार जीबीयू