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ये होता तो न होती उत्तराखंड तबाही!
अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 20 Feb 2014 12:25 PM IST
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देश में जितने ज्यादा राडार होंगे मौसम की उतनी ही सटीक जानकारी मिल सकेगी, क्योंकि अभी 16 राडार हैं जबकि जरूरत 36 की है। ये बातें मौसम वैज्ञानिक टीएन कृष्णमूर्ति ने बुधवार को कहीं।
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सेक्टर-62 स्थित नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फॉरकास्टिंग (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) में आयोजित 25वें जुबली समारोह का बुधवार को समापन हुआ।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में 45 से ज्यादा मौसम वैज्ञानिकों ने अपने विचार साझा किए। समापन अवसर पर टीएन कृष्णमूर्ति ने कहा कि 36 राडार होने पर बेहतर आंकड़े प्राप्त होंगे, जिससे मौसम की सटीक घोषणा करने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त राडार होते तो उत्तराखंड में आयी तबाही की जानकारी काफी पहले मिल सकती थी। वहीं आईएएफ के विंग कमांडर एके देवरानी ने बताया कि एनसीएमआरडब्ल्यूएफ से प्राप्त होने वाले आंकड़े वायुसेना के लिए बेहद अहम हैं।
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कार्यक्रम के अंतिम सत्र में पैनल डिस्कशन हुआ। इसमें मौसम की जानकारी को कैसे और बेहतर बनाया जाए, इस पर प्रो. जे शुक्ला, डॉ. कमल पुरी, डॉ. किरण कुमार, प्रो. जीएस भाट, प्रो. बीएन गोस्वामी, डॉ. एलएस राठौर और डॉ. स्वाति बसु ने सुझाव दिए। इस मौके पर वरिष्ठ वैज्ञानिक एके मित्रा, वीके गौर, एमके सिंह, सुधांशु शेखर, विनोद कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे।