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नरेला अग्निकांड : 12 घंटे की शिफ्ट में फैक्टरी में काम करते थे कर्मचारी, सभी रहते थे ऊपरी मंजिल पर
Sun, 09 Jun 2024 06:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 09 Jun 2024 06:20 AM IST
सार
फैक्टरी में काम करने वाले सभी कर्मचारी फैक्टरी की ही ऊपरी मंजिल पर रहते थे। परिवार वालों के मुताबिक कर्मचारियों से आठ घंटे काम करवाने के बाद उनसे चार घंटे अतिरिक्त काम लिया जाता था।
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हादसे के बाद...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नरेला औद्योगिक क्षेत्र में मूंग दाल ड्राई करने वाली फैक्टरी में आग से जान गंवाने वाले तीन कर्मचारियों के परिवार वालों का कहना है कि सभी कर्मचारी फैक्टरी में बारह घंटे की शिफ्ट में यहां काम करते थे। यहां पर कुल 18 से 20 कर्मचारी काम करते हैं, जिसमें एक शिफ्ट में 9 से 10 कर्मचारी काम करते हैं।
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फैक्टरी में काम करने वाले सभी कर्मचारी फैक्टरी की ही ऊपरी मंजिल पर रहते थे। परिवार वालों के मुताबिक कर्मचारियों से आठ घंटे काम करवाने के बाद उनसे चार घंटे अतिरिक्त काम लिया जाता था।
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हादसे में जान गंवाने वाले श्याम के चचेरे भाई भोला ने बताया कि उनके भाई फैक्टरी में काम करते थे। वह फैक्टरी की ऊपरी मंजिल पर रहते थे। वह दो शिफ्ट में काम करते थे। एक शिफ्ट 12 घंटे की होती थी। फैक्टरी के भूतल पर मशीन लगी थी, जहां वह काम करते थे। काम करने के बाद ऊपर की मंजिल पर ही सभी कर्मचारी खाना बनाकर खाते थे। भोला ने बताया कि श्याम की शुक्रवार रात की शिफ्ट थी।
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वहीं वीरपाल के बेटे आकाश ने बताया कि उनके पिता फैक्टरी में तीस साल से काम कर रहे थे। वह फैक्टरी की ऊपर की मंजिल पर रहते थे। दो शिफ्ट में कुल 18 से 20 कर्मचारी काम करते थे। एक शिफ्ट में 9 से 10 कर्मचारी काम करते थे। उनके पिता की रात की शिफ्ट थी।
इसी तरह राम सिंह के चाचा अवधेश सिंह ने बताया कि उनका भतीजा इस फैक्टरी में काम कर रहा था। लोगों ने बताया कि घटना के समय वह मशीन के पास ही काम कर रहा था। बॉयलर के विस्फोट होने के दौरान मशीन के पास होने की वजह से वह चपेट में आ गया।
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