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नैना साहनी तंदूर कांडः हाईकोर्ट ने सुशील कुमार को तुरंत रिहा करने का दिया आदेश, 23 साल से है कैद

Fri, 21 Dec 2018 03:26 PM IST
शशांक गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शशांक गौर Updated Fri, 21 Dec 2018 03:26 PM IST
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naina sahni tandoor kand: delhi high court orders immediate release of sushil kumar
- फोटो : PTI

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1995 के तंदूर कांड मामले में 23 साल से उम्रकैद की सजा काट रहे सुशील शर्मा को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। इससे पहले 12 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि आखिर 23 साल होने के बाद भी सुशील को रिहा क्यों नहीं किया गया और इस बारे में सरकार से जवाब मांगा था। 

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कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि यह बेहद गंभीर मुद्दा है। सुशील शर्मा अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या के सिलसिले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने शर्मा की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।
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उसके बाद 18 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा था कि, क्या हत्या के दोषी किसी शख्स को अनिश्चित काल तक जेल में रखने की अनुमति दी जा सकती है, जबकि वह अपनी सजा पूरी कर चुका है।
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हाईकोर्ट ने 1995 के तंदूर कांड में उम्रकैद की सजा काट रहे सुशील शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार से यह सवाल पूछा है। सुशील शर्मा ने पत्नी नैना साहनी की हत्या कर दी थी।

न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा था कि याची 25 साल से अधिक समय से जेल में है। हत्या अपने आप में जघन्य है। वह अपनी सजा तकरीबन पूरी कर चुका है। क्या अब उसे जेल में रखना उसके मानवाधिकारों का हनन नहीं है?

खंडपीठ ने यह राय सजा माफी बोर्ड (एसआरबी) की रिपोर्ट आने के बाद जाहिर की थी। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शर्मा द्वारा ऐसा अपराध दोबारा किए जाने की संभावना नहीं है। वह समाज के लिए खतरा नहीं है। 

कोर्ट ने इस पर गौर करते हुए पूछा था कि फिर उसे अनिश्चित काल के लिए जेल में क्यों रखा जाए। दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि एसआरबी ने सुशील शर्मा को जल्द न छोड़ने की सिफारिश की थी।

उपराज्यपाल इस सिफारिश को पहले ही स्वीकार कर चुके हैं। दूसरी ओर, विधि विभाग के सचिव ने कहा था कि जल्द रिहाई संबंधी दिशा-निर्देश उन पर बाध्यकारी नहीं हैं और सुशील शर्मा के साथ भेदभाव हुआ है।

याचिका अधिवक्ता अमित साहनी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि सुशील शर्मा का मामला पहली श्रेणी में आता है। वह 29 साल की सजा अब तक काट चुका है। इसमें से परोल व जमानत की अवधि हटा दी जाए तो वह 23 साल व छह माह की सजा काट चुका है।

याचिका में शर्मा ने कहा कि दोषियों को जल्दी रिहा करने संबंधी दिशा-निर्देश के मुताबिक, एक अपराध की सजा काट रहे दोषियों को 20 साल और एक से अधिक अपराध में सजा काट रहे दोषियों को रिहा करने पर 25 साल की अवधि पूरी होने पर विचार किया जाना चाहिए।

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