{"_id":"5e59bdc38ebc3ec54c6d621c","slug":"muslim-brothers-got-hindu-sister-married-during-violence-in-delhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्लीः हिंसा के दौरान मुस्लिम भाइयों ने पहरा देकर करवाई हिंदू बहन की शादी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्लीः हिंसा के दौरान मुस्लिम भाइयों ने पहरा देकर करवाई हिंदू बहन की शादी
Sat, 29 Feb 2020 06:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 29 Feb 2020 06:56 AM IST
विज्ञापन
सौहार्द के पहरेदार...
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर-पूर्वी दिल्ली का इलाका जहां एक ओर हिंसा की आग में जल रहा था वहीं, इंसानियत के रक्षक अपना दायित्व निभा रहे थे। चांद बाग में जब दो समुदाय के लोग एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू थे, उसी वक्त कुछ मुस्लिम युवकों ने रक्षक बनकर एक लड़की की शादी करवाई।
चांद बाग में रहने वाली 23 वर्षीय सावित्री की मंगलवार को शादी थी। वहीं उपद्रवी पूरे इलाके में हिंसा फैल रहे थे। सावित्री के पिता ने उपद्रव के बावजूद उसी दिन शादी करने का फैसला किया। सावित्री के पिता में यह हिम्मत उनके पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम युवकों ने दी थी।
उन लोगों ने शादी में किसी तरह की अड़चन आने नहीं देने की कसम खा रखी थी। शादी के दौरान सावित्री के मुस्लिम भाइयों ने पहरा देकर शादी को शांतिपूर्ण संपन्न करवाया। अपने मुस्लिम भाइयों का प्यार देखकर सावित्री बीच- बीच में रोने लगी।
विज्ञापन
उसे परिवार वालों ने ढांढस बंधाया। जिस दौरान सावित्री के विवाह की रस्में निभाई जा रही थी। वहीं से कुछ दूरी पर उपद्रवी एक- दूसरे के खून के प्यासे हो रहे थे। सावित्री के पिता ने बताया कि जब वह अपने छत पर गए तो हर तरफ उन्हें धुएं का गुबार दिखाई दिख रहा था।
विज्ञापन
चांद बाग में रहने वाली 23 वर्षीय सावित्री की मंगलवार को शादी थी। वहीं उपद्रवी पूरे इलाके में हिंसा फैल रहे थे। सावित्री के पिता ने उपद्रव के बावजूद उसी दिन शादी करने का फैसला किया। सावित्री के पिता में यह हिम्मत उनके पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम युवकों ने दी थी।
विज्ञापन
उन लोगों ने शादी में किसी तरह की अड़चन आने नहीं देने की कसम खा रखी थी। शादी के दौरान सावित्री के मुस्लिम भाइयों ने पहरा देकर शादी को शांतिपूर्ण संपन्न करवाया। अपने मुस्लिम भाइयों का प्यार देखकर सावित्री बीच- बीच में रोने लगी।
विज्ञापन
उसे परिवार वालों ने ढांढस बंधाया। जिस दौरान सावित्री के विवाह की रस्में निभाई जा रही थी। वहीं से कुछ दूरी पर उपद्रवी एक- दूसरे के खून के प्यासे हो रहे थे। सावित्री के पिता ने बताया कि जब वह अपने छत पर गए तो हर तरफ उन्हें धुएं का गुबार दिखाई दिख रहा था।