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Delhi Schools: बच्चों के बौद्धिक विकास का पता लगाने में जुटा निगम, पढ़ाई और सीखने समझने की स्थिति की ली जा रही जानकारी

Mon, 13 Jun 2022 05:28 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 13 Jun 2022 05:28 AM IST
सार

दिल्ली नगर निगम ने स्कूलों के प्रत्येक बच्चे के बौद्धिक विकास का पता लगाने का काम शुरू कर दिया है। इससे एक-एक बच्चे की मौजूदा पढ़ाई और उसके सीखने-समझने की सही स्थिति का पता लगेगा, जिसके बाद शिक्षकों को ऐसे बच्चों को सिखाने में मदद मिलेगी।

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municipal corporation of delhi engaged in ascertaining the intellectual development of children
दिल्ली सरकारी स्कूल - फोटो : Twitter

विस्तार

दिल्ली नगर निगम का एक स्कूल दुनिया के शीर्ष 10 श्रेष्ठ विद्यालयों के रूप में चुना गया है। इस उपलब्धि के लिए एमसीडी की तारीफ हो रही है। अब एमसीडी अपनी जिम्मेदारियों को और बेहतर तरीके से निभाने में लग गया है, जिसके तहत विद्यालयों के प्रत्येक बच्चे के बौद्धिक विकास का पता लगाने का काम शुरू किया है। इससे एक-एक बच्चे की मौजूदा पढ़ाई और उसके सीखने-समझने की सही स्थिति का पता लगेगा, जिसके बाद शिक्षकों को ऐसे बच्चों को सिखाने में मदद मिलेगी।

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एमसीडी के विद्यालयों में ज्यादातर कमजोर तबके के बच्चे पढ़ते हैं। अधिकतर बच्चों के अभिभावक मजदूरी या फिर छोटे रोजगार के सहारे परिवार चलाते हैं। इनमें अनगिनत बच्चे अपने माता-पिता के साथ काम में हाथ बटाते हैं। इसका नतीजा ये है कि एमसीडी विद्यालयों में पढ़ने वाले ये बच्चे कई-कई दिन स्कूल से अनुपस्थित हो जाते हैं। इनकी नियमित पढ़ाई-लिखाई बाधित होती रहती है, जिस कारण उनके सीखने समझने की क्षमता प्रभावित होती है, लेकिन अब एमसीडी ने तय किया है कि उसके पास बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है, जिसे वह खास तरीके से निभाएगा। इसके लिए एमसीडी ने योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू किया है।
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जांची जा रही बच्चों की वृद्धि रिपोर्ट
बच्चों की वृद्धि रिपोर्ट जांची जा रही है। पिछली कक्षा में अगर कोई बच्चा वर्णमाला लिखना जानता था, तो अगली कक्षा में उसने अक्षरों को मिलाकर लिखना-पढ़ना सीखा या नहीं। पिछली कक्षा में वह जोड़, घटाव, गुणा और भाग जानता था तो अगली कक्षा में उसने इसके आगे क्या सीखा। मौजूदा समय एक-एक विद्यालयों के बच्चों की वृद्धि रिपोर्ट शिक्षा निदेशक तक पहुंच रही है।
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बच्चे और माता-पिता की काउंसलिंग
बच्चों और उनके माता-पिता की काउंसलिंग कराई जा रही है। इन्हें समझाया जा रहा है कि बच्चे का नियमित रूप से स्कूल आना जरूरी है। उन्हें समझाया जा रहा है कि एमसीडी ने उनके बच्चे की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए योजना बनाई है। इसमें उनके सहयोग की जरूरत है।


अभिभावकों को बैठाकर समझाना बड़ी चुनौती
प्रत्येक अभिभावक और उनके बच्चों को बैठाकर समझाना बड़ी चुनौती है, लेकिन यह चुनौती स्वीकार की गई है। बच्चे के एकल विकास के लिए यह काम शुरू किया गया है। एक-एक बच्चे की मॉनीटरिंग की जा रही है। -विकास त्रिपाठी, शिक्षा निदेशक, दिल्ली नगर निगम

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