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बेटी की मौत के तीन साल बाद भी रिपोर्ट के लिए चक्कर काट रही मां

Tue, 17 Sep 2019 03:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली
धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 17 Sep 2019 03:33 AM IST
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Mother roaming for FIR in delhi even after three years of daughter's death
दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर - फोटो : दिल्ली पुलिस वेबसाइट

बेशक दिल्ली पुलिस बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जो उसकी कलई खोल देते हैं। ऐसा ही मामला एक महिला की कथित दहेज हत्या से जुड़ा है। बेटी की मौत के तीन साल बाद भी बिजनौर निवासी उसकी मां एफआईआर के लिए थाने और अदालत के चक्कर काट रही है।

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मामला उत्तर पूर्वी जिले के गोकुल पुरी थाना इलाके का है। कड़कडड़ूमा जिला अदालत के सीएमएम देवेंद्र कुमार गर्ग ने पुलिस को रुकसाना का बयान एसडीएम के समक्ष कराने का निर्देश नौ सितंबर 2019 को दिया था। रुकसाना 11 सितंबर को थाना गोकुल पुरी पहुंच गई और वहां पूरे दिन रही, लेकिन उसका बयान एसडीएम के समक्ष दर्ज नहीं कराया गया। 
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अब मामले की सुनवाई 20 सितंबर को होनी है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी रुकसाना ने अपनी बेटी तरन्नुम की दहेज हत्या की एफआईआर थाने में दर्ज कराने में नाकाम रहने के बाद अगस्त 2016 में अधिवक्ता अरुण राघव के जरिये कड़कडड़ूमा जिला अदालत में अर्जी दायर की थी। 
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इस पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस ने एटीआर दाखिल नहीं की। जो शिकायत तरन्नुम व उसकी मां रुकसाना ने पुलिस को दी थीं, वह भी पुलिसवालों ने खो दी। इस बात को एसएचओ ने कोर्ट में स्वीकार भी किया। 

कोर्ट में शिकायत में रुकसाना ने कहा कि उसकी बेटी तरन्नुम की शादी दस मई 2015 को मुस्तफाबाद निवासी मोहम्मद शफीक से हुई थी। शफीक के माता-पिता नहीं थे और उसकी शादी मामा-मामी ने की थी। उसकी बेटी को शादी के एक सप्ताह बाद ही दहेज में कार न लाने का ताना देकर मारपीट होने लगी। तरन्नुम ने खुद भी पति व ससुराल वालों द्वारा मारपीट की शिकायत 17 जून 2016 को पुलिस को दी थी। 

उसका आरोप था कि 5 अक्तूबर 2015 को ससुरालवालों ने कहा कि वह कार लेकर आए नहीं तो वह शफीक की तीसरी शादी कर देंगे। उस समय वह गर्भवती थी और यह बात सुनकर उसे भारी धक्का लगा। तरन्नुम से 20 जनवरी 2016 को मारपीट की गई, जिसमें उसके कान पर चोट लगी। इस मारपीट से उसकी हालत खराब होने लगी। 


इसके बाद ससुराल वाले उसे मायके छोड़ गए। चोट लगने के कारण 5 अप्रैल 2016 को उसका गर्भपात हो गया। इसके बाद भी ससुराल वाले उसे देखने तक नहीं आए। 20 जून 2016 को तरन्नुम चल बसी। उसकी मां ने इसकी शिकायत 1 जुलाई को पुलिस को दी लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।

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