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“क्राइम के लिए उम्र नहीं, सज़ा के लिए उम्र देखते हैं”

Mon, 14 Dec 2015 10:02 PM IST
Updated Mon, 14 Dec 2015 10:02 PM IST
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mother of nirbhaya share her emotions with BBC

बीबीसी हिंदी से बातचीत में ‘निर्भया’ की मां आशा देवी ने कहा है कि उनकी बेटी को सच्ची श्रद्धांजली तभी मिलेगी जब मुजरिमों को फांसी लग जाएगी।

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दिल्ली में चलती बस में एक छात्रा के साथ हिंसक गैंगरेप की घटना के तीन साल पूरे होने पर आशा देवी ने कहा कि “क्राइम के लिए उम्र नहीं, सज़ा के लिए उम्र देखते हैं"।
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सितंबर 2013 को अदालत ने मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता को गैंगरेप के लिए दोषी पाया था और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी। अभियुक्त बस ड्राइवर राम सिंह जेल में मृत पाया गया था।
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मुजरिम को बचाने के लिए कायनात लग जाती है

mother of nirbhaya share her emotions with BBC

इस घटना में दोषी पाए गए नाबालिक की सुधार गृह से रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक उसे एक एनजीओ को सौंपा जा सकता है।


इस पर आशा देवी ने कहा, “अगर एक मुजरिम को बचाना होता है तो पूरी कायनात लग जाती है कि फांसी नहीं होनी चाहिए, उनको सज़ा नहीं होनी चाहिए। अगर एक बच्ची रोड पर पड़ी रहती है, चिल्लाती है बचाने के लिए तो कोई सुनता ही नहीं है।"

बीबीसी से इस बातचीत में आशा देवी ने बीते तीन सालों के कुछ मुश्किल पलों को याद किया। साथ ही उन्होंने घटना के बच्चों पर पड़े प्रभाव पर भी बात की।


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