दिल्ली के प्रदूषण से बचाने में अधिकतर मास्क कारगर नहीं
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दिल्ली में प्रदूषण जहां फिर से लोगों की सांसों को सांसत में डाल चुका है। वहीं बाजारों, बस और मेट्रो में भी लोग मास्क लगाए घुम रहे हैं। मास्क की बिक्री भी तेज हो गई है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 से भी छोटे कण होने की वजह से ज्यादात्तर मास्क इंसानों के लिए लाभ नहीं पहुंचा सकते।
किसी भी शोध में यह सामने नहीं आया है कि मास्क पीएम 2.5 या इससे छोटे आकार के प्रदूषकों से बचाने में असरदार हैं। उन्होंने बताया कि छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर शरीर के सभी अंगों तक पहुंचकर नुकसान पहुंचाने लगते हैं।
हालांकि प्रदूषित इलाकों में कुछ बेहतर मास्क का इस्तेमाल किया जाए तो कुछ हद तक राहत मिल सकती है। एम्स के डॉ. जावेद बताते हैं कि सामान्य सर्जिकल मास्क और धूल रोकने वाले मास्क भी किसी काम के नहीं हैं। ये छोटे आकार के कणों को सांस की नली में जाने से नहीं रोक पाते।
मास्क खरीदने से पहले उसमें देखें कि फिल्टर और पहने के लिए दो इलास्टिक होनी चाहिए। एक इलास्टिक वाले मास्क में कई खुली जगह छूट जाती है। कई बार ऐसा होता है कि लोग मास्क पहने हुए हैं, लेकिन बाहर से हवा जा रही है।
ऐसे मास्क पहनने से कोई फायदा नहीं होगा। एन 96 मास्क को सबसे सुरक्षित माना जाता है। डॉक्टर भी आमतौर पर यही मास्क यूज करते हैं। एन-95 का अर्थ है कि ये मास्क 95 प्रतिशत प्रदूषण को फेंफड़ों तक जाने से रोक देते हैं।