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Morigate Ramleela: राम-लक्ष्मण का दादा रावण से सामना, नारी का रूप धर नर करते हैं राम की लीला

Thu, 29 Sep 2022 05:14 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 29 Sep 2022 05:14 PM IST
सार

मोरी गेट की रामलीला की खासियत है कि यहां आज भी सीता से लेकर मंदोदरी और कौशल्या से लेकर कैकई तक सारे महिला किरदार पुरुष ही निभाते हैं।

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Delhi Ramleela Grandfather and Grandsons Play Role of Ravana and Ram Lakshman in Mori Gate Ramleela
दादा-पोते निभा रहे राम, लक्ष्मण और रावण का किरदार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की कई रामलीलाएं ऐसी हैं, जहां एक परिवार के कई लोग मंच पर त्रेतायुग को जीवंत कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है तिकोना पार्क अखाड़ा मोरी गेट की रामलीला। यहां 73 साल के महावीर प्रसाद गुप्ता रावण की भूमिका निभाने वाले हैं तो उनके पोते रुद्राक्ष राम और आरव लक्ष्मण का किरदार को निभा रहे हैं। मंच पर दादा पोतों के बीच यह नाटकीय युद्ध देखने के लिए श्रद्धालु उत्सुक रहते हैं।  

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मोरी गेट की भारती आदर्श रामलीला कमेटी के प्रधान महावीर बताते हैं कि उन्होंने आठ साल की उम्र में रामलीला में भाग लेना शुरू किया। 1970 में दिल्ली आए तो उन्होंने किशन पहलवान के साथ यहां रामलीला करवानी शुरू की। वह बीते 50 सालों से रामलीला में विभिन्न किरदारों में दिखते आ रहे हैं। कहते हैं कि रामलीला का मंच तैयार होने पर वह खुद को रोक नहीं पाते। यही कारण है कि इस उम्र में भी मंच पर पहुंच जाते हैं। बचपन में वानर सेना का हिस्सा रहे महावीर राम, दशरथ, परशुराम का किरदार निभा चुके हैं। बीते 15 वर्षों से वह लगातार रावण बन रहे हैं। 

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दादा से प्रेरित होकर उनके पोते रुद्राक्ष और आरव भी रामलीला में अभिनय करते आ रहे हैं। बीती कई रामलीलाओं से राम-लक्ष्मण की यह जोड़ी अपने रावण बने अपने दादा का सामना करती है। 21 वर्षीय रुद्राक्ष और 18 वर्षीय आरव कहते हैं कि दादा की तरह उन्होंने भी बचपन से ही रामलीला को बेहद करीब से देखा है। दादा लंबे समय से मंचन से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके साथ मंच साझा करना उन दोनों के लिए गर्व की बात है।  

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नारी का रूप धर नर करते हैं राम की लीला
मोरी गेट की रामलीला की खासियत है कि यहां आज भी सीता से लेकर मंदोदरी और कौशल्या से लेकर कैकई तक सारे महिला किरदार पुरुष ही निभाते हैं। भारतीय आदर्श रामलीला कमेटी की रामलीला में हारमोनियम, ढोलक और तबले की जुगलबंदी के बीच कलाकार चौपाइयों का गायन करते हुए अभिनय करते हैं। कमेटी की महासचिव सपना टांक पहलवान कहती हैं कि 1969 में उनके पिता किशन पहलवान ने इसकी स्थापना की थी। 2020 में पिता के निधन के बा वह भाई चेतन के साथ विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। 

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