नमक बिगाड़ रहा सेहत: किस उम्र में कितनी जरूरत, ज्यादा लेने पर पड़ रहे बीमार, काला और सेंधा भी नहीं सुरक्षित
काला नमक, सेंधा नमक का इस्तेमाल भी सुरक्षित नहीं है। हमें खाने में सोडियम की मात्रा को नियंत्रित रखना चाहिए। लेकिन मरीजों का विश्लेषण बताता है कि डिब्बा-पैकेट बंद खाना व दूसरे कारणों से मरीज नमक की मात्रा को पार कर देता है।
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विस्तार
खाने में रोजाना पांच ग्राम से ज्यादा नमक का सेवन आपकी सेहत बिगाड़ सकता है, लेकिन अंजाने में ज्यादातर लोग इस मात्रा से ज्यादा नमक खा रहे हैं। देशभर में कई जगहों पर मरीजों के विश्लेषण से इसका पता चला। रविवार को दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने इसी समस्या से निपटने के लिए देशभर के विशेषज्ञों के साथ शोध के आधार पर चर्चा की। साथ ही सरकार को नमक की मात्रा तय करने के लिए सुझाव भी भेजा। इस दौरान डॉ. राजन रविचंद्रन ने बताया कि 12 साल से अधिक के लिए दिन में पांच ग्राम नमक बहुत है। यदि इससे ज्यादा का सेवन करते हैं तो शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ती है। जो हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, स्ट्रोक सहित दूसरे रोग दे सकता है।
काला और सेंधा भी नहीं सुरक्षित
काला नमक, सेंधा नमक का इस्तेमाल भी सुरक्षित नहीं है। हमें खाने में सोडियम की मात्रा को नियंत्रित रखना चाहिए। लेकिन मरीजों का विश्लेषण बताता है कि डिब्बा-पैकेट बंद खाना व दूसरे कारणों से मरीज नमक की मात्रा को पार कर देता है। यहीं कारण है कि लोगों में बीपी का स्तर बढ़ रहा है। वहीं डॉ. विजय खैर ने बताया की खाने को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सालों से नमक का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन इन दिनों खानपान में इसका स्तर तेजी से बढ़ा, जो स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बच्चों में बढ़ा रहा मोटापा
नेफ्रोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. भरत शाह ने कहा कि डिब्बा व पैकेट बंद खाने के इस्तेमाल के बढ़ने से बच्चों में मोटापे के साथ दूसरी समस्याएं देखी जा रही हैं। 100 से अधिक बच्चों पर हुए शोध से पता चला कि इन खानों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए मानक से अधिक नमक का इस्तेमाल होता है। यह नमक बच्चों की जरूरत से अधिक होता है तो शरीर में विकार बनाता है। इस शोध में नमक के ज्यादा इस्तेमाल से मोटापे के साथ दूसरी समस्याएं देखी गई।
| उम्र | नमक की मात्रा |
| 0-1 साल | 0 ग्राम |
| 5-6 साल | 2.5 से 3 ग्राम |
| 12 साल से अधिक | 5 ग्राम |
- उच्च रक्तचाप
- दिल से जुड़े रोग
- ब्रेन स्ट्रोक
- पेट से जुड़े कैंसर
- किडनी में स्ट्रोन
- अन्य
सरकार को भेजा सुझाव
डॉक्टरों ने विचार-विमर्श के बाद खाने पर नमक के मात्रा की लेबल लगाने की मांग रखी। डॉक्टरों ने बताया कि दक्षिण भारत के दो राज्यों में मिड डे मील में दिए जाने वाले खाने में नमक की मात्रा को सुधार कर बच्चों में हो सकने वाले रोग की आशंका को कम किया। इस प्रयास से सुधार दिखा। डॉक्टरों ने सरकार से मांग रखी है कि बच्चों की जरूरत के आधार पर नमक की मात्रा तय होनी चाहिए।
डॉक्टरों ने कहा कि भगवत गीता में सात्विक के आहार की चर्चा है। यदि शरीर की जरूरत के आधार पर आहार का चयन किया जाता है तो वह दवा की तरह काम करती है। ऐसे व्यक्ति को भविष्य में दवाओं की जरूरत नहीं होती।