इस एक कारण से बेहद बचैनी से नतीजों का इंतजार कर रहे MCD चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार
200 नए पार्षदों के सदन पहुंचने की संभावना
- तीनों नगर निगमों के सदन में नया होगा इस बार का नजारा
- लगभग 70 उम्मीदवार ही पहले रह चुके हैं पार्षद
विनोद डबास
विस्तार
तीनों नगर निगमों के नए सदन में नजारा भी पूरी तरह नया नजर आएगा। अधिकतर पार्षद पहली बार सदन के सदस्य बनेंगे। दरअसल, भाजपा ने अपने किसी भी वर्तमान पार्षद को टिकट नहीं दिया, जबकि कांग्रेस ने आधे से अधिक पार्षदों को टिकट नहीं दिया।
दोनों दलों ने पूर्व पार्षदों को भी टिकट देने में कंजूसी बरती है। ऐसे में तीनों नगर निगमों के 272 पार्षदों में से 200 से अधिक उम्मीदवारों के पहली बार पार्षद चुने की जाने की संभावना है।
तीनों नगर निगमों के वर्तमान 272 पार्षदों में से करीब 40 पार्षदों ने ही चुनाव लड़ा है।
कांग्रेस के टिकट पर 31 पार्षद चुनाव लड़े हैं, जबकि 10 पार्षद आम आदमी पार्टी, स्वराज इंडिया के टिकट के अलावा निर्दलीय के तौर पर चुनावी दंगल में कूदे हुए हैं। कांग्रेस के उत्तरी दिल्ली नगर निगम में नौ, दक्षिण दिल्ली नगर निगम में 17 और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में पांच पार्षदों ने चुनाव लड़ा है।
जीत का चौका लगाने की लाइन में कई पार्षद
आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद दक्षिण दिल्ली नगर निगम के विभिन्न वार्डों से चुनावी मैदान में हैं। स्वराज इंडिया के टिकट पर एक महिला पार्षद ने चुनाव लड़ा है। वहीं, भाजपा से बागी होकर पांच पार्षद चुनावी दंगल में कूदे हैं।
इनमें एक उम्मीदवार को चार बार पार्षद चुना जा चुका है। इन पार्षदों में कई जीत का चौका और हैट्रिक लगाने की लाइन में हैं। वहीं, कुछ पार्षद दूसरी बार नगर निगम के सदन में दस्तक दे सकते हैं।
इसके अलावा करीब 30 पूर्व पार्षदों ने भी चुनाव लड़ा है। भाजपा ने दस पूर्व पार्षदों को, जबकि कांग्रेस ने 19 पूर्व पार्षदों को चुनावी मैदान में उतारा। वहीं, आम आदमी पार्टी के टिकट पर दो पूर्व पार्षदों ने चुनाव लड़ा है। पूर्व पार्षदों में विशेषकर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे कई कद्दावर नेता हैं।
इनमें एकीकृत नगर निगम में महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति के अध्यक्ष जैसे बड़े पदों पर रहने वाले शामिल हैं। खास बात यह है कि अधिकतर वर्तमान और पूर्व पार्षद आमने-सामने नहीं हैं। उनका नए चुनावी खिलाड़ियों के साथ मुकाबला हो रहा है।