कोरोना का खतराः तब्लीगी जमात ने की सरकारी आदेश की अनदेखी, जलसे में आए थे 15 हजार से अधिक लोग
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हजरत निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज में आयोजित जोड़ (जलसे) में 20 राज्यों के 15 हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे। इस भीड़ में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी थे। सूत्रों का कहना है कि इनमें कई कोरोना पॉजिटिव भी थे, जिन्होंने वहां आए लोगों को संक्रमित किया। ये लोग अपने राज्य लौटे और देशभर में बीमारी का प्रसार कर दिया। तब्लीगी जमात की करतूत की वजह से अब पूरा देश कोरोना का खतरा झेल रहा है। विभिन्न राज्यों की सरकारें निजामुद्दीन स्थित जलसे में शामिल हुए लोगों की तलाश में जुटी हैं। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार इस जलसे में शामिल स्थानीय लोगों की भी तलाश करा रही है।
पूरे घटनाक्रम के बाद मरकज प्रशासन खुद को पाक-साफ बताने में जुटा है। देश में कोरोना का खतरा मंडराने पर दिल्ली सरकार ने पहले एक स्थान पर 50 से अधिक और इसके बाद 5 लोगों के जुटने पर पाबंदी लगाई थी। मरकज प्रशासन ने दिल्ली सरकार के आदेशों की पूरी तरह अनदेखी की और 15 से 17 मार्च तक दक्षिण भारतीय राज्यों का जलसा आयोजित किया। इसमें दक्षिण के साथ ही उत्तर भारतीय राज्यों के लोग भी थे।
यहां 20 राज्यों के 15 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। जनता कर्फ्यू से पूर्व ज्यादातर लोग अपने-अपने घर लौट गए। प्रधानमंत्री ने कोरोना की वजह से देश को 21 दिन के लिए लॉकडाउन किया तो मरकज की ओर से दावा किया गया कि यहां एक हजार लोग फंस गए हैं। प्रशासन ने लोगों को यहां से निकालना शुरू किया तो बुधवार सुबह तक 2300 से अधिक लोग निकाले जा चुके थे। इनमें से 500 से अधिक की तबीयत ठीक नहीं थी। उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
यह पूरी तरह साफ है कि मरकज प्रशासन के कारण ही कोरोना संदिग्ध लगभग पूरे देश में पहुंच गए। बता दें कि पूरे साल मरकज में रोज 7 से 8 हजार लोग मौजूद रहते हैं। जोड़ या मशवरे के दौरान इनकी तादाद 12-13 हजार या उससे भी ज्यादा हो जाती है। हर बृहस्पतिवार को मौलाना साद या अन्य मौलानाओं के बयान सुनने के लिए दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग मरकज में जमा होते हैं।
जेएनयू के कुछ छात्रों ने मरकज के पक्ष में जारी किया पोस्टर
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के कुछ छात्र देशभर में कोरोना वायरस पहुंचाने की वजह बने तब्लीगी जमात के मरकज के साथ खड़े दिखे। जेएनयू के छात्रों ने मरकज के समर्थन में पोस्टर जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। इन छात्रों का आरोप है कि मरकज की जानकारी पुलिस को पहले से थी। इसके बावजूद पुलिस मरकज को दोषी क्यों ठहरा रही है।