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BikeBot Scam : यूपी के बाइकबोट घोटाले में 394 करोड़ रुपये की और संपत्तियां जब्त, प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई
Mon, 01 Sep 2025 04:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 01 Sep 2025 04:25 AM IST
सार
इनमें कामाख्या एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, कामाख्या एजुकेशनल सोसायटी, गुरु नानक चैरिटेबल ट्रस्ट, अल्पाइन टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी, एपी गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट और मीना आनंद शामिल हैं।
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- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तर प्रदेश के बाइकबोट पोंजी घोटाले में 394.42 करोड़ रुपये से अधिक की नई संपत्तियां जब्त की हैं। संपत्तियां विभिन्न ट्रस्ट, सोसाइटी और व्यक्तियों के नाम पर हैं। इनमें कामाख्या एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, कामाख्या एजुकेशनल सोसायटी, गुरु नानक चैरिटेबल ट्रस्ट, अल्पाइन टेक्निकल एजुकेशन सोसाइटी, एपी गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट और मीना आनंद शामिल हैं।
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इससे पहले, वर्ष 2020 और 2023 में ईडी ने 220.78 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। ईडी ने बताया कि जब्त संपत्तियों में 389.30 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां और 5.12 करोड़ रुपये की एफडी शामिल हैं। संपत्तियां निवेशकों को ठगकर वसूले गए धन से खरीदी गईं थीं। निवेशकों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इसके बाद, ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
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शिकायत में कहा गया था, गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लि. और इसके प्रमोटर संजय भाटी ने बाइकबोट के नाम पर निवेशकों को ठगा। ईडी की जांच में सामने आया कि जुटाए गए फंड से शैक्षिक ट्रस्टों और सोसाइटी के जरिये मेरठ में संपत्तियां खरीदी गईं। ब्यूरो
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निवेशकों को ऐसे बनाया शिकार योजना के तहत ग्राहकों से 1, 3, 5 या 7 बाइक में निवेश करवाया जाता था और कंपनी की ओर से उन्हें हर महीने किराया, ईएमआई और बोनस देने का वादा किया जाता था। साथ ही, नए निवेशक जोड़ने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाता था। जबकि असलियत में कई शहरों में बाइक टैक्सी कभी शुरू ही नहीं हुई।