{"_id":"a985a136ed59dfc577d10a6de39061d0","slug":"monkeys-attack-falling-from-the-roof-of-the-death-wrestler-bljora-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदरों का हमला, छत से गिरकर बलजोरा पहलवान की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदरों का हमला, छत से गिरकर बलजोरा पहलवान की मौत
अमर उजाला, मोदीनगर
Updated Mon, 07 Dec 2015 01:05 AM IST
विज्ञापन
महाजनान कॉलोनी में बंदरों के एक झुंड के खौफ से देश के नामी पहलवान बलजोरा की छत से गिरकर मौत हो गई। घटना के समय 76 वर्षीय पहलवान अपने मकान की छत पर टहल रहे थे।
विज्ञापन
इसी दौरान बंदरों के झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। बंदरों से बचने को वह तेजी से भागे और इसी दौरान पैर फिसलने से छत से नीचे जा गिरे। घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है।
विज्ञापन
बलजोरा पहलवान अच्छे तैराक भी थे। स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने अपने जीवनकाल में करीब 60-70 लोगों को गंगनहर में डूबने से बचाया था।
महाजनान कॉलोनी की काली गली में फकीरचंद (75) उर्फ बलजोरा पहलवान परिवार सहित रहते थे। उनके बेटे नरेंद्र शर्मा ने बताया कि पिता बलजोरा रविवार सुबह करीब साढे़ 9 बजे छत पर टहल रहे थे।
विज्ञापन
इसी बीच छत पर बंदरों का एक झुंड आकर बैठ गया। अचानक बंदर उनकी ओर बढ़ने लगे। बंदरों को अपनी ओर आता देख बेंत से उन्हें भगाने की कोशिश की। इस पर बंदर आक्रामक हो गए और तेजी से उनकी और दौडे़।
बंदरों के खौफ के चलते वह चीखते हुए तेजी से नीचे की ओर भागे, मगर पैर फिसला और वह छत से नीचे आ गिरे। बुजुर्ग की चीख सुनकर परिवार के लोग छत की ओर दौड़े और बंदरों को भगाया।
छत से नीचे देखा तो वह अचेत पडे़ थे। आनन फानन में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
डाक्टरों ने संभावना जताई है कि छत से गिरने और बंदरों के खौफ से शायद हार्ट अटैक होने से उनकी मौत हुई है। उधर घटना के बाद से ही मोहल्ले में दहशत है। बंदरों के खौफ के चलते लोगों ने छतों पर जाना बंद कर दिया है।
पहलवानी में जीते थे 11 गोल्ड
बेटे नरेंद्र शर्मा ने बताया कि पिता फकीरचंद उर्फ बलजोरा ने आयुध निर्माणी फैक्ट्री की तरफ से पहलवानी की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में 11 गोल्ड मेडल जीते थे।
वह ‘शाहजहांपुर केसरी’ के नाम से पहचाने जाते हैं। आसपास के क्षेत्र में बलजोरा पहलवान के नाम से जाने जाते हैं। वर्ष 2002 में वह आयुध निर्माणी मुरादनगर से रिटायर हुए थे।
मोरटा में बच्चे की जान ले चुके हैं बंदर: मुरादनगर थाना क्षेत्र में बंदरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कई माह पूर्व मुरादनगर थाना क्षेत्र के ही गांव मोरटा में बंदर ने एक मासूम विकलांग बच्चे की जान ले ली थी।
मासूम के जुड़वां भाई ने घटना से कुछ देर पहले ही बंदर को पत्थर मारकर भगा दिया था। बाद में बंदर आया और अंदर कमरे में घुसकर बच्चे की गला दबाकर हत्या कर दी।