मिशन 'मंगल' के बाद अब मिशन 'जमीं से आसमां तक'
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फरीदाबाद पहले चंद्रायन और फिर मंगल मिशन...इन दोनों से शहर का नाम जुड़ने के साथ ही इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि किस प्रकार से यहां पर एयरोस्पेस सेक्टर से जुड़े उत्पाद तैयार करने को बढ़ावा मिले।
इंटीग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (आईएमएसएमई) ऑफ इंडिया ने समय को देखते हुए इस ओर पहले ही कदम बढ़ा दिया था। अब इस काम में और तेजी लाई जाएगी।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए मशहूर रहे फरीदाबाद का नाम जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरोस्पेस क्षेत्र में योगदान के लिए लिया है तब से उद्योग जगत में इस सेक्टर की ओर कदम बढ़ाने के लिए चर्चा छिड़ी हुई है।
बदलते परिदृश्य को उद्योगपति बड़े अवसर के रूप में ले रहे हैं। ऐसे में अब कुछ उद्यमियों ने ऑटोमोबाइल पार्ट्स के साथ-साथ एयरोस्पेस क्षेत्र में भी भाग्य आजमाने का निर्णय लिया है।
फ्रांस और जर्मनी से हो चुका है करार
आईएमएसएमई ऑफ इंडिया ने इसके लिए फ्रांस और जर्मनी से लघु उद्योगों को तकनीकी सहायता देने का कुछ दिन पहले ही करार किया है। इस मुहिम का हिंदी नाम ‘जमीं से आसमां तक’ दिया गया है।
जिसमें इस बात के लिए प्रेरित किया जाएगा मोटर साइकिलों एवं कारों के पार्ट्स बनाने के साथ-साथ अब हवाई जहाज, सैटेलाइट एवं स्पेस लांचिंग व्हीकल के भी पार्ट्स बनाए जाएं।
इस कड़ी में सितंबर 2013 में कुछ उद्यमी फ्रांस में मिराज एवं एयरबस बनाने वाली कंपनियों का भ्रमण करके आ चुके हैं। संगठन के चेयरमैन राजीव चावला ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि एयरोस्पेस क्षेत्र में काम करने वाली विदेशी कंपनियों को भी भारतीय वेंडरों की जरूरत है। इसलिए ट्रेनिंग एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर जो भी खर्च आएगा उसका वहन फ्रांस की सरकार करेगी।
चावला ने बताया कि इस बाबत उनकी संस्था का फ्रांस सरकार के साथ एक करार हुआ है। जर्मनी की एक संस्था स्टैन बैस के साथ सेक्टर-24 में लघु उद्योगों के लिए इनोवेशन सेंटर खोलने का करार हुआ है।
भारत में शोध क्यों बढ़ाना चाहती हैं कंपनियां
केंद्र सरकार ने
डिफेंस ऑफसेट पॉलिसी बनाई है। जिसके तहत भारत में रक्षा साजोसामान आपूर्ति
करने वाले को 30 फीसदी सामान भारतीय लघु उद्योगों से लेना होगा। ऐसे में
रक्षा क्षेत्र के अग्रणी कारोबारी फ्रांस चाहता है कि कुछ उद्योग उसकी
गुणवत्ता का सामान बनाएं। ताकि वह यहां पर अपने रक्षा सामान बेचने पर इन
उद्योगों के जरिए 30 फीसदी खरीद की शर्त पूरी करे।
एयरोस्पेस सेक्टर में जाने की कोशिश में जुटी कंपनियां
प्रेस्टो स्टैंटेस्ट, बेलमैक्स, चंदा इंटरप्राइजेज, रागा इंजीनियर्स, रिलायबल डीजल इंजीनियर्स, पावाह टूल्स एंड कंपोनेंट्स, प्रियांशु इंजीनियरिंग, डाहरा इंजीनियरिंग, प्राइम पोलिमर, जयराज एंसलरीज, यूनिक मोल्डिंग, इंडक्ट इंजीनियर्स, अरिहंत इंटरप्राइजेज, हरियाणा ग्राइंडवेल इंडस्ट्रीज, यूनिक मोल्डिंग, पीएमटी इंजीनियर्स, पीवाईएन इंडस्ट्रीज, अरविंद इंजीनियर्स, आनंद इंजीनियरिंग।
मंगलयान का सामान देने वाली कंपनी के कार्यकारी निदेशक, डॉ. एसके गोयल का कहना है कि, ‘प्रधानमंत्री ने इस औद्योगिक शहर के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है। इससे एयरोस्पेस और डिफेंस क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या बढ़ेगी। विदेश जाने वाली रकम अपने देश में लगेगी।’