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सड़क जामः बेतरतीब खड़ी हो जाती है स्कूल बसें
ब्यूरो/अमर उजाला, कुंदन तिवारी
Updated Wed, 07 May 2014 05:48 PM IST
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निजी स्कूलों की मनमानी सिर्फ फीस को लेकर ही नहीं चल रही है। वह आम जनता को भी परेशान कर रहे हैं। जिला प्रशासन भी अब निजी स्कूल प्रशासन के आगे बौना साबित हो रहा है। ऐसे में अभिभावकों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना कराने में वह किसके पास संपर्क करें।
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इन स्कूलों के कुप्रबंधन से आम लोगों का रास्ता बंद हो जाता है तो उसमें पढ़ने वाले बच्चों की जान भी खतरे में रहती है। फीस वृद्धि से अलग हटकर की जा रही निजी स्कूलों की मनमानी पर अमर उजाला ने पड़ताल की। पेश है संवाददाता कुंदन तिवारी और फोटोग्राफर गौरव चौधरी की रिपोर्ट।
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स्कूल छूटते ही लग जाता है जाम
अभिभावकों के मुताबिक शहर की तंग गलियों के स्कूल हो या किसी हुडा सेक्टर के। लगभग अधिकांश में सुप्रीम कोर्ट के उस नियम की पालना नहीं की जा रही है, जिसमें कहा गया था कि कोई भी स्कूल बच्चों को सड़क पर नहीं छोड़ेगा। स्कूल की बसें स्कूल के अंदर से ही फुल होकर निकलेंगी और स्कूल के अंदर ही बच्चों को छोड़ा जाएगा। अधिकांश स्कूलों में बसें अंदर जाती ही नहीं हैं।
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मानक पूरे नहीं, स्कूल कर दिया अपग्रेड
स्कूल संचालकों ने प्री नर्सरी, नर्सरी, प्राइमरी, मिडिल के नाम पर हुडा से सस्ते दाम पर जमीन खरीदी। लेकिन शिक्षा विभाग की मिलीभगत से स्कूलों में कक्षाएं बढ़ा दीं। जिस कारण स्कूल में बच्च्चों की संख्या बढ़ गई और जगह कम पड़ती गई। इसलिए अब सुबह और दोपहर में स्कूलों पर जाम लग रहा है। कुछ सेक्टरों के निवासी स्कूलों की वजह से लगने वाले जाम को लेकर परेशान हैं।
...तो बीन बजाते रह जाएंगे फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस
घनी आबादी में खुले स्कूलों की जैसे ही छुट्टी होती है। सड़क पूरी तरह से जाम हो जाती है। ऐसे में आसपास रहने वाले लोग और दुकानदार सब के सब आधे-पौन घंटे के लिए कैद हो जाते हैं। वहीं स्कूल छूटने से आधे घंटे पहले से सड़कों पर बसों एवं वैन का जाम लग जाता है। ऐसा लगता है कि यह रास्ता नहीं बाजार है। ऐसे में अगर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड भी जा रही हो तो भी उसे बीन ही बजाना पड़ेगा।
दुर्घटना का बना रहता डर
अभिभावकों का आरोप है कि सड़क पर बच्चों को छोड़ने से सुरक्षा तार तार होती है। ऐसे में उनके बच्चों को कोई भी अगवा कर सकता है। बच्चों की सुरक्षा के साथ स्कूल प्रशासन खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है। अचानक बच्चों के सड़क पर आने से रास्ते में चलने वाले तेज रफ्तार वाहनों उन्हें अपनी चपेट में ले सकते हैं। इसका हमेशा भय बना रहता है।