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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Minor discrepancies by witnesses in railway accidents cannot prevent compensation.

Delhi NCR News: रेलवे दुर्घटना में गवाहों की छोटी असंगतियों पर मुआवजा नहीं रोका जा सकता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 05:46 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल रेल दुर्घटना के मामलों में गवाहों की दूरी या समय संबंधी मामूली असंगतियों का हवाला देकर मुआवजे का दावा खारिज नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की एकलपीठ ने राज कुमारी नाम की एक पीड़िता के मामले में रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द कर दिया।

ट्रिब्यूनल ने 2019 में हुई एक घातक रेल दुर्घटना के मामले में मुआवजे की मांग खारिज कर दी थी, जिसमें गवाहों की गवाही में दूरी और समय को लेकर छोटी असंगतियों को आधार बनाया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे एक्ट 1989 की धारा 124-ए के तहत अनटूवर्ड इंसिडेंट (अप्रत्याशित घटना) में सख्त दायित्व (स्ट्रिक्ट लायबिलिटी) लागू होता है। ऐसे मामलों में दावों को अति-तकनीकी आधारों पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले को रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल को वापस भेज दिया है, जहां अब मुआवजे की राशि तय की जाएगी।
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कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु
1. यात्रा टिकट न मिलना मुआवजा देने से इनकार करने का ठोस आधार नहीं है।
2. बोनाफाइड यात्री होने का दावा साबित होने पर बोझ रेलवे पर शिफ्ट हो जाता है।
3. इनक्वेस्ट रिपोर्ट और जीआरपी रिकॉर्ड की तुलना में डीआरएम की विलंबित रिपोर्ट का कोई खास महत्व नहीं होता।

4. गवाहों की गवाही में दूरी या समय को लेकर मामूली अंतर सामान्य है और इन्हें पूरे दावे को खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
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