मेट्रो का सफर बेशक हुआ महंगा पर इससे बेहतर विकल्प नहीं...
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मेट्रो किराये में बढ़ोतरी को लेकर आम लोग ही नहीं बल्कि छात्रों में भी रोष है, लेकिन दूसरा विकल्प न होने के कारण वे अधिक किराया देना मजबूरी मान रहे हैं। उनका मानना है कि मेट्रो ने एक वर्ष में दो बार किराया बढ़ाकर उनकी जेब ढीली की है। जो मेट्रो कल तक सभी की चहेती व मनपसंद थी आज उनकी मजबूरी बन गई है।
मयूर विहार फेज तीन निवासी रवि कुमार रोजाना मेट्रो से पटेल चौक नौकरी के लिए आते हैं। वह न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन से पटेल चौक तक मई से पहले 16 रुपये किराया देते थे। 10 मई को पहले चरण की बढ़ोत्तरी के बाद यह 30 रुपये हो गया।
किराया बढ़ा तो रवि न्यू अशोक नगर से स्टेशन बदलकर मयूर विहार फेज वन एक्सटेशन से पटेल चौक आने लगा। इससे दूरी 12.085 से घटकर 11.049 किलोमीटर हो गई और किराया 30 के बजाए 20 रुपये हो गया। जबकि स्टेशन तक छोड़ने वाला ई-रिक्शा पहले के जैसा ही 15 रुपये लेता है।
आज भी मेट्रो दूसरे परिवहन साधनों से बेहतर है
रवि बताते हैं कि 10 अक्तूबर से फिर किराया बढ़ने से अब किराया फिर से 30 रुपये हो गया है। जब उनसे पूछा की वह निजी वाहन या कार पूलिंग क्यों नहीं करते तो उन्होंने बताया कि मेट्रो का किराया बढ़ने के बाद भी इससे सफर करना उनकी मजबूरी है। आज भी वह दूसरे परिवहन साधनों से बेहतर है।
रवि ने कहा कि अगर मैं उबर या ओला कंपनियों के कार शेयरिंग विकल्प लेता हू तो भी मेरा न्यूनतम किराया एक तरफ से 99 रुपये लगता है। कई बार यह 150 या इससे अधिक भी होता है। बस सस्ती तो जरूर है लेकिन समय पर ऑफिस पहुंचा देगी इसकी गारंटी नहीं है। इसलिए मैं मानता हूं कि मेरे लिए अब भी मजबूरी में ही सही मेट्रो बेहतर विकल्प है।
इसी तरह वैशाली से रोजाना द्वारका स्थित भगिनी निवेदिता कॉलेज जाने वाली संतोषी बताती हैं कि जहां मई से पहले किराया 28 रुपये लगता अब 60 रुपये पहुंच गया है। पहले महीनेभर का खर्च 840 था अब 1800 पहुंच गया है। इससे हमारे पॉकेट मनी पर भी फर्क पड़ेगा, लेकिन इससे बेहतर और सस्ता विकल्प भी नहीं है।
हालांकि कुछ यात्रियों ने कहा कि वह अपने सीएनजी वाहन को प्रयोग कर सकते हैं। उत्तम नगर के सुरेश लालवानी ने बताया कि वह उत्तम नगर से प्रगति मैदान आते हैं। उनका किराया पहले 30 था अब 40 हो गया।
वह उत्तम नगर स्टेशन तक जाने के लिए रोजाना 20 रुपये ई-रिक्शा को देते हैं। वह कहते हैं अगर मै सीएनजी कार चलाऊंगा तो लगभग इतना ही खर्च आएगा। हालांकि वह जाम के डर से गाड़ी के बजाए मेट्रो को प्राथमिकता देते आएं।