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Delhi NCR News: अब आठ-दस साल की बच्चियों में शुरू हो रही महावारी
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मोटापा, जंक फूड और हार्मोनल बदलाव समस्या की बड़ी वजहें
सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। लड़कियों में कम उम्र में माहवारी (पीरियड्स) शुरू होने के मामले बढ़ रहे हैं। पहले जहां आमतौर पर 12 से 14 वर्ष की उम्र में माहवारी आती थी, वहीं अब 8 से 10 साल की बच्चियों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। मोटापा, जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं।
गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या रश्मि ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में समय से पहले यौवनारंभ और कम उम्र में माहवारी शुरू होने के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। बच्चों में बढ़ता मोटापा शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को प्रभावित करता है, जिससे माहवारी सामान्य उम्र से पहले शुरू हो सकती है। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड, बढ़ता स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इस बदलाव को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा कि कम उम्र में माहवारी शुरू होने से बच्चियां कई बार मानसिक रूप से असहज महसूस करती हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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केस स्टडी-1
पूर्वी दिल्ली की नौ साल की बच्ची को अचानक रक्तस्राव की शिकायत हुई। जांच में समय से पहले यौवनारंभ की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने वजन नियंत्रण और नियमित निगरानी की सलाह दी।
केस स्टडी-2
10 वर्षीय एक बच्ची में उम्र से पहले शारीरिक बदलाव और माहवारी के लक्षण दिखाई दिए। जांच में मोटापा और हार्मोनल असंतुलन कारण पाए गए। जीवनशैली में सुधार के बाद स्थिति नियंत्रित हुई।
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अगर ये लक्षण दिखाई दें तो ले डॉक्टर की सलाह
-आठ वर्ष से पहले यौवनारंभ के संकेत दिखें।
-शारीरिक बदलाव तेजी से होने लगे।
-बच्ची में तनाव, घबराहट या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं दिखे।
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सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। लड़कियों में कम उम्र में माहवारी (पीरियड्स) शुरू होने के मामले बढ़ रहे हैं। पहले जहां आमतौर पर 12 से 14 वर्ष की उम्र में माहवारी आती थी, वहीं अब 8 से 10 साल की बच्चियों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। मोटापा, जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं।
गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या रश्मि ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में समय से पहले यौवनारंभ और कम उम्र में माहवारी शुरू होने के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। बच्चों में बढ़ता मोटापा शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को प्रभावित करता है, जिससे माहवारी सामान्य उम्र से पहले शुरू हो सकती है। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड, बढ़ता स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इस बदलाव को प्रभावित करती है।
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उन्होंने कहा कि कम उम्र में माहवारी शुरू होने से बच्चियां कई बार मानसिक रूप से असहज महसूस करती हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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केस स्टडी-1
पूर्वी दिल्ली की नौ साल की बच्ची को अचानक रक्तस्राव की शिकायत हुई। जांच में समय से पहले यौवनारंभ की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने वजन नियंत्रण और नियमित निगरानी की सलाह दी।
केस स्टडी-2
10 वर्षीय एक बच्ची में उम्र से पहले शारीरिक बदलाव और माहवारी के लक्षण दिखाई दिए। जांच में मोटापा और हार्मोनल असंतुलन कारण पाए गए। जीवनशैली में सुधार के बाद स्थिति नियंत्रित हुई।
अगर ये लक्षण दिखाई दें तो ले डॉक्टर की सलाह
-आठ वर्ष से पहले यौवनारंभ के संकेत दिखें।
-शारीरिक बदलाव तेजी से होने लगे।
-बच्ची में तनाव, घबराहट या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं दिखे।