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AAP Vs BJP: क्या है स्टैंडिंग कमेटी, जिसे लेकर भिड़े भाजपा और आप के पार्षद, इसकी ताकत कितनी, जानें
Thu, 23 Feb 2023 12:20 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 23 Feb 2023 12:20 PM IST
सार
Powers and Duties of Standing Committee: बड़ा सवाल ये है कि आखिर स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव भाजपा और आप दोनों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है कि इसे लेकर रातभर सदन में हंगामा हुआ। इस स्टोरी में पढ़ें क्या है स्टैंडिंग कमेटी के पावर कि हर पार्टी इसके चेयरमैन का पद चाहती है...
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए बुधवार को चुनाव बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गए। लेकिन शाम को जब स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों के लिए वोटिंग शुरू हुई तो उसमें जमकर बवाल हुआ जो रातभर चला और आज सुबह भी जारी रहा।
सदन का हंगामा थमता न देखकर मेयर शैली ओबरॉय ने कल (24 फरवरी) सुबह तक के लिए सदन स्थगित कर दिया। अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव भाजपा और आप दोनों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है कि इसे लेकर रातभर सदन में हंगामा हुआ। इस स्टोरी में पढ़ें क्या है स्टैंडिंग कमेटी के पावर कि हर पार्टी इसके चेयरमैन का पद चाहती है...
स्टैंडिंग कमेटी हर सदन चाहे वह देश की संसद हो, राज्यों की विधानसभा हो या निगम की स्टैंडिंग कमेटी हो बेहद ताकतवर होती है। मालूम हो कि दिल्ली के मेयर और डिप्टी मेयर के पास भी फैसले लेने की उतनी शक्तियां नहीं होतीं जितनी स्टैंडिंग कमेटी के पास होती है।
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इसकी एक बड़ी वजह ये है कि 18 सदस्यों वाली स्टैंडिंग कमेटी ही निगम के अधिकतर चाहे वो आर्थिक हों या प्रशासनिक फैसले लेती है। इस कमेटी से ही सभी तरह के प्रस्तावों को सदन से पास करवाने के लिए भेजा जाता है। इस तरह एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन का पद काफी शक्तिशाली हो जाता है और पूरे निगम पर इसका दबदबा होता है।
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सदन का हंगामा थमता न देखकर मेयर शैली ओबरॉय ने कल (24 फरवरी) सुबह तक के लिए सदन स्थगित कर दिया। अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव भाजपा और आप दोनों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है कि इसे लेकर रातभर सदन में हंगामा हुआ। इस स्टोरी में पढ़ें क्या है स्टैंडिंग कमेटी के पावर कि हर पार्टी इसके चेयरमैन का पद चाहती है...
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स्टैंडिंग कमेटी हर सदन चाहे वह देश की संसद हो, राज्यों की विधानसभा हो या निगम की स्टैंडिंग कमेटी हो बेहद ताकतवर होती है। मालूम हो कि दिल्ली के मेयर और डिप्टी मेयर के पास भी फैसले लेने की उतनी शक्तियां नहीं होतीं जितनी स्टैंडिंग कमेटी के पास होती है।
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इसकी एक बड़ी वजह ये है कि 18 सदस्यों वाली स्टैंडिंग कमेटी ही निगम के अधिकतर चाहे वो आर्थिक हों या प्रशासनिक फैसले लेती है। इस कमेटी से ही सभी तरह के प्रस्तावों को सदन से पास करवाने के लिए भेजा जाता है। इस तरह एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन का पद काफी शक्तिशाली हो जाता है और पूरे निगम पर इसका दबदबा होता है।
ऐसे होता स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव-
6 सदस्यों की ऐसे होती है वोटिंग
स्टैंडिंग कमेटी में कुल 18 सदस्य होते हैं जिनमें से छह का चुनाव तो निगम के पार्षद सदन की पहली बैठक में वोटिंग के माध्यम से करते हैं। यह वोटिंग गुप्त होती है और इनका चुनाव राज्यसभा सदस्यों की तरह वरीयता के आधार पर होता है। दरअसल पार्षदों को अपने उम्मीदवारों को बैलेट पेपर पर वरीयता के हिसाब से 1,2,3 नंबर देने होते हैं। अगर पहली वरीयता के आधार पर चुनाव नहीं हो पाता तो दूसरे और तीसरे वरीयता के वोट की काउंटिंग आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर की जाती है।यहां आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी चिंता ये है कि मेयर और डिप्टी मेयर दोनों ही चुनाव में उसके कुछ पार्षदों ने भाजपा के लिए क्रॉस वोटिंग की है। अगर ऐसा ही रहा तो जो आप छह में से चार सीटें जीत रही थी वह उससे कम सीट जीतेगी और फिर बहुमत का सारा गणित बिगड़ जाएगा।
स्टैडिंग कमेटी के 12 सदस्य ऐसे चुने जाते हैं
18 में से 12 सदस्यों को अलग-अलग जोन से चुनकर लाया जाता है। जोन की मीटिंग में मनोनीत पार्षदों को भी वोटिंग का अधिकार मिल जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना मनोनीत पार्षदों के आम आदमी पार्टी 12 में से 8 सीट पर अपने सदस्य आसानी से ले आती, वहीं भाजपा को चार जोन में जीत हासिल होती। लेकिन उपराज्यपाल द्वारा जारी नोटिस के बाद मनोनीत पार्षदों को सिर्फ तीन जोन में नियुक्त किया गया है जिससे भाजपा की चार के बजाय 7 सीट जीतने की प्रबल संभावना है।भाजपा बहुमत में आई तो बढ़ेगी टकराव की स्थिति
आम आदमी पार्टी अगर छह में से तीन सीट भी जीत लेती है और उसके 7 सदस्य यदि अगल-अलग जोन से चुनकर आते हैं तो भाजपा का स्टैंडिंग कमेटी में 10 सीटों के साथ बहुमत हो जाएगा। ऐसे में आम आदमी पार्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद हासिल करके भी अपने प्रस्ताव स्टैंडिंग कमेटी से पास नहीं करवा सकेगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह सदन के पटल पर भी नहीं मान्य होगा और फिर मेयर बनवाने का भी कोई फायदा आप को नहीं मिलेगा और दिल्ली सरकार की तरह निगम में भी टकराव की स्थिति बढ़ती जाएगी।