MCD Mayor Election: महापौर चुनाव छह जनवरी को, पहले साल महिला पार्षद होगी मेयर, केवल तीन महीने का होगा कार्यकाल
एमसीडी के सदन का कार्यकाल पांच साल का होता है। डीएमसी एक्ट के तहत पहले साल महिला पार्षद को महापौर चुने जाने का प्रावधान है, जबकि उपमहापौर के मामले में कोई नियम नहीं है।
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उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने निगम के महापौर और उप महापौर पद के चुनाव की तिथि तय कर दी है। एमसीडी के सदन की पहली बैठक छह जनवरी को होगी। सदन की स्थायी समिति के छह सदस्य भी इसी दिन चुने जाएंगे। नगर निगम चुनाव में प्रदर्शन को देखते हुए सदन में आम आदमी पार्टी का पलड़ा भारी है। 250 सदस्यीय सदन में 134 सदस्य आप के हैं।
इससे पहले एमसीडी ने नए सदन की पहली बैठक आयोजित करने के लिए सोमवार को दिल्ली सरकार को फाइल भेजी थी। एमसीडी अब उपराज्यपाल के अधीन आने के कारण दिल्ली सरकार ने फाइल उनके पास भेज दी। उपराज्यपाल सचिवालय ने सदन की बैठक आयोजित करने की मंजूरी दे दी। उन्होंने सदन की बैठक करने की तिथि छह जनवरी तय की है। इस बैठक में नवनिर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाई जाएगी।
उपराज्यपाल वरिष्ठ पार्षद को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करेंगे। इनको राजस्व विभाग के मध्य जिले के जिलाधीश शपथ दिलाएंगे। इसके बाद पीठासीन अधिकारी सभी पार्षदों को बारी-बारी से शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण के बाद महापौर का चुनाव होगा। नवनिर्वाचित महापौर कार्यभार संभालने के बाद सबसे पहले उपमहापौर का चुनाव कराएंगे। साथ ही स्थायी समिति के छह सदस्यों का भी चुनाव होगा।
निगम जारी करेगा अधिसूचना
उधर, उपराज्यपाल से इजाजत मिलने के बाद एमसीडी ने सदन की पहली बैठक की तैयारी शुरू कर दी है। निगम सचिवालय अब महापौर, उपमहापौर व स्थायी समिति के छह सदस्यों के चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा। अधिकारी बताते हैं कि 26 दिसंबर से नामांकन पत्र दाखिल कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। 30 दिसंबर तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे। चुनाव की नौबत आने पर निगम प्रशासन बैलेट पेपर छपवाने का समय चाहिए।
पहले साल महिला पार्षद होंगी मेयर
एमसीडी के सदन का कार्यकाल पांच साल का होता है। डीएमसी एक्ट के तहत पहले साल महिला पार्षद को महापौर चुने जाने का प्रावधान है, जबकि उपमहापौर के मामले में कोई नियम नहीं है। वहीं, दूसरे साल महापौर पद पर कोई भी पार्षद चुना जा सकता है, जबकि तीसरे साल मेयर पद अनुसूचित जाति के पार्षदों के लिए आरक्षित है। चौथे व पांचवें साल महापौर पद किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है। एमसीडी की सबसे अधिकार वाली स्थायी समिति के अध्यक्ष पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है।
पहले महापौर का कार्यकाल करीब तीन माह का ही होगा
एमसीडी के सदन की बैठक छह जनवरी को होने पर उस दिन चुने जाने वाले महापौर का कार्यकाल मात्र तीन माह का ही होगा। दरअसल डीएमसी एक्ट की धारा दो (67) के अनुसार एमसीडी का अप्रैल माह के प्रथम दिन से वर्ष शुरू होता है। इस तरह 31 मार्च को वर्ष समाप्त हो जाता है। लिहाजा अप्रैल माह में दूसरे महापौर का चुनाव होगा। इस तरह छह जनवरी को चुने जाने वाले महापौर का कार्यकाल करीब तीन माह में ही 31 मार्च को समाप्त हो जाएगा, जबकि महापौर के कार्यकाल की अवधि एक साल होती है।
एमसीडी के सदन की बैठक अप्रैल माह से पहले होने की स्थिति में पहले महापौर के कार्यकाल की अवधि एक वर्ष के बजाए कुछ माह तक ही होने के बारे में सभी राजनीतिक दलों और एमसीडी को भी मालूम है। इस बारे में गत 22 अक्तूबर को अमर उजाला में भी खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बावजूद सदन की पहली बैठक जल्द से जल्द आयोजित करने की मांग की जा रही थी। इस कारण एमसीडी ने सदन की बैठक आयोजित कराने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी और उपराज्यपाल ने भी बैठक की तिथि तय कर दी है। वहीं किसी भी राजनीतिक दल ने इस दिशा में उपराज्यपाल का भी ध्यान आकर्षित नहीं कराया।
सदन की बैठक अप्रैल माह से पहले होने का खामियाजा महिला पार्षदों को भुगतना पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए पहले वर्ष महापौर का पद आरक्षित है। अगले चार साल के दौरान महिला पार्षद को महापौर पद का उम्मीदवार बनाने मा मामला राजनीतिक दलों पर निर्भर रहेगा। वर्ष 1997 में भी ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई थी, जब एमसीडी के चुनाव फरवरी माह में कराए गए थे और चुनाव के बाद एमसीडी के सदन के गठन की कवायद आरंभ कर दी गई। उस दौरान डीएमसी एक्ट के जानकारों ने बताया था कि एमसीडी का वर्ष 31 मार्च को खत्म होता है। इस कारण पहले साल महापौर चुने जाने वाली महिला पार्षद का कार्यकाल एक माह बाद ही समाप्त हो जाएगा। यह मामला सामने आने के बाद एमसीडी के सदन की पहली बैठक अप्रैल माह में आयोजित की गई थी और उस बैठक में ही महापौर का चुनाव कराया गया था। इस तरह फरवरी माह में चुने गए पार्षद एक माह से अधिक समय तक खाली रहे थे।