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कांथापुरम के बयान पर टिप्पणी: मौलाना साजिद राशिदी बोले- प्रकृति चाहती है महिला घर संभाले, सख्त कानून भी जरूरी
Mon, 31 Aug 2026 05:53 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Mon, 31 Aug 2026 05:53 PM IST
सार
दिल्ली में कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की महिलाओं पर टिप्पणी के बाद मौलाना साजिद राशिदी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून जरूरी हैं। राशिदी ने ये भी दोहराया कि इस्लामी कानून लागू होने तक महिलाएं सुरक्षित नहीं रहेंगी।
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मौलाना साजिद राशिदी का बयान
- फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
दिल्ली में कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब तक देश में इस्लामी कानून लागू नहीं होते, तब तक महिलाएं सुरक्षित नहीं रहेंगी।
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#WATCH | Delhi: On Kanthapuram AP Aboobacker Musliyar’s remarks on women, All India Imam Association President, Maulana Sajid Rashidi says, "...until Islamic laws are implemented in the country, women will not be safe..."
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He says, "...keeping one's daughter safe amidst these… pic.twitter.com/gZiWNa59Ln — ANI (@ANI) August 31, 2026
मौलाना साजिद राशिदी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अपनी बेटियों को सुरक्षित रखना माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपनी बेटी की सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन स्वतंत्रता और समानता के नाम पर लड़कियों को कार्यक्षेत्र में लाने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के मन में स्वतंत्रता और समानता के विचार भरकर उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया गया और इसी के बाद बर्बादी तथा अनैतिकता की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने और हर क्षेत्र में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।
राशिदी ने कहा कि प्रकृति चाहती है कि महिला घर पर रहकर गृहस्थी संभाले और बच्चों की देखभाल करे। उनके अनुसार, पुरुषों को बाहर जाकर कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने, आजीविका कमाने तथा पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए बनाया गया है।
उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस्लाम में निर्धारित सख्त कानून लागू करने या कम से कम यौन हिंसा करने वालों के लिए कड़ी सजा की जरूरत बताई। राशिदी ने दोहराया कि उनके अनुसार देश में इस्लामी कानून लागू होने तक महिलाएं सुरक्षित नहीं रहेंगी।