Pahalgam Attack: 'आतंकवादी इंसान नहीं, पर मुस्लिमों को निशाना बनाना गलत', पहलगाम हमले पर बोले मौलाना मदनी
मौलाना अरशद मदनी ने पहलगाम हमले की निंदा की। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की आलोचना की और सिंधु जल संधि, वक्फ कानून व सुरक्षा चूक पर सवाल उठाए। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध और आतंकवाद को स्रोत पर रोकने की वकालत की।
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद (अरशद मदनी गुट) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने रविवार को पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले करने वाले आतंकवादी इस्लाम के सिद्धांतों से अनजान हैं और उन्हें इंसान नहीं माना जा सकता। हालांकि, उन्होंने पूरे मुस्लिम समुदाय खासकर कश्मीरियों को इसके बाद निशाना बनाए जाने की आलोचना की और इसे सरकार की नफरत भरी नीतियों का परिणाम बताया।
सुरक्षा चूक पर सवाल
मदनी ने पहलगाम जैसे पर्यटक स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 3,000 से अधिक पर्यटकों की मौजूदगी के बावजूद आतंकवादी आसानी से हमला करने में सफल रहे। उन्होंने कहा, 'हमले के बाद पुलिस और सेना को पहुंचने में डेढ़ घंटा लगा, जबकि स्थानीय लोग ही पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए। यह सुरक्षा व्यवस्था की स्पष्ट विफलता है।' उन्होंने सरकार से जांच की मांग की कि इतना बड़ा हमला सीमा के भीतर कैसे हुआ।
जमीयत की दो दिवसीय कार्यसमिति बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में मदनी ने सरकार के सिंधु जल संधि को खत्म करने के फैसले की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'चिनाब, रावी, झेलम, व्यास और सतलुज नदियां हजारों सालों से बह रही हैं। इस पानी को रोकना या कहीं और ले जाना आसान नहीं है।'
आतंकवाद को स्रोत पर रोकने की जरूरत
पाकिस्तान का नाम लिए बिना मदनी ने कहा कि सरकार को आतंकवाद को उसके स्रोत पर रोकना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हमले न हों। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को सौ प्रतिशत यकीन है कि कश्मीर में सिर्फ हमलावरों के घर ढहाए गए तो यह कार्रवाई उचित है, लेकिन केवल संदेह के आधार पर ऐसी कार्रवाई गलत होगी।
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वक्फ संशोधन अधिनियम पर आपत्ति
मदनी ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम को वक्फ संपत्तियों को हड़पने का प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून संपत्तियों की रक्षा नहीं, बल्कि उन्हें छीनने का काम करेगा। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया और बताया कि जमीयत ने लाखों लोगों की भागीदारी के साथ तीन रैलियां आयोजित कीं, जो पूरी तरह शांतिपूर्ण रहीं। उन्होंने जोर दिया कि विरोध संवैधानिक अधिकारों के दायरे में होना चाहिए।
अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई और युद्ध की चेतावनी
मदनी ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराया, लेकिन कहा कि पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के बंगाली भाषी लोगों को इसकी आड़ में परेशान नहीं करना चाहिए। पाकिस्तान के साथ संभावित युद्ध पर उन्होंने कहा कि युद्ध कोई समाधान नहीं है, क्योंकि इसके गंभीर आर्थिक परिणाम होंगे।
प्रेम और शांति का संदेश
मदनी ने कहा कि नियम प्रेम पर आधारित होने चाहिए, न कि नफरत पर। उन्होंने अपने जीवन का हवाला देते हुए कहा, 'मैं एक मुसलमान हूं और मैंने अपना पूरा जीवन इस देश में बिताया है। कुछ प्रचार देश के हित में नहीं हैं।' उन्होंने जोर दिया कि जमीयत शांतिप्रिय संगठन है और कानून को अपने हाथ में लेने के खिलाफ है।