{"_id":"61e11f31209f890df9394e6e","slug":"marital-sexual-assault-criminalization-delhi-high-court-asks-centre-if-sex-worker-has-right-to-say-no-then-why-not-wife","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैवाहिक दुष्कर्म अपराधीकरण: कोर्ट ने पूछा- जब यौनकर्मी को ना कहने की छूट तो पत्नी को कम अधिकार क्यों","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैवाहिक दुष्कर्म अपराधीकरण: कोर्ट ने पूछा- जब यौनकर्मी को ना कहने की छूट तो पत्नी को कम अधिकार क्यों
Fri, 14 Jan 2022 12:29 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 14 Jan 2022 12:29 PM IST
सार
न्यायमूर्ति शकधर ने कहा कि इस मामले का उल्लेख करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार इस मामले में रचनात्मक दृष्टिकोण पर विचार कर रही है।
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह वैवाहिक दुष्कर्म को आपराधिक बनाने के मुद्दे पर रचनात्मक दृष्टिकोण पर विचार कर रहा है। इसके लिए राज्य सरकारों, भारत के मुख्य न्यायाधीश, सांसदों समेत अन्य गणमान्य लोगों से भी इसमें व्यापक संशोधन पर सुझाव मांगे हैं। इससे संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उनके सामने इस मामले का उल्लेख किया।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति शकधर ने कहा कि इस मामले का उल्लेख करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार इस मामले में रचनात्मक दृष्टिकोण पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार की वकील मोनिका अरोड़ा ने पीठ को बताया कि केंद्र आपराधिक कानून में संशोधन का एक व्यापक कार्य कर रहा है। इसमें आईपीसी की धारा 375 (दुष्कर्म) शामिल है।
विज्ञापन
हमने इसके लिए सभी राज्य सरकारों के सभी मुख्यमंत्रियों...भारत के मुख्य न्यायाधीश, सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश...न्यायिक अकादमियों, राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालयों, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सभी अदालतों के बार काउंसिल, सदस्यों सहित संसद के दोनों सदनों के सदस्यों ने आपराधिक कानूनों में व्यापक संशोधन के संबंध में राय मांगी है।
विज्ञापन
अदालत ने केंद्र से पूछा ये अहम सवाल
अदालत ने कहा कि कानून में बदलाव में काफी समय लगेगा। केंद्र सरकार से यह बताने को कहा कि क्या वह विशेष रूप से वैवाहिक दुष्कर्म के अपवाद के मुद्दे से निपट रही है। अगर (खंड) 375 के संबंध में केंद्र के पास कुछ सुझाव हैं तो उस पर विचार करेंगे।
आमतौर पर इस प्रक्रिया में काफी वक्त लगेगा, इसलिए याचिकाओं पर सुनवाई जारी रहेगी। गृह मंत्रालय के अवर सचिव की ओर से दायर अतिरिक्त हलफनामे में केंद्र ने कहा कि वह पहले से ही इस मामले में कहा चुके है वैवाहिक दुष्कर्म को केवल याचिकाकर्ताओं के कहने पर ही समाप्त नहीं किया जा सकता है।
अदालत ने की यौनकर्मी के हक को लेकर टिप्पणी
न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जब दुष्कर्म कानून एक यौनकर्मी के साथ जबरन यौन क्रियाकलापों के मामले में कोई छूट नहीं देता है तो पत्नी को कम अधिकार क्यों दिया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई 14 जनवरी को जारी रहेगी।