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टोल प्लाजा के बाद अब मार्बल मार्केट बना बड़ी मुसीबत
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Thu, 20 Feb 2014 07:54 PM IST
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गुड़गांव-दिल्ली बॉर्डर स्थित मार्बल मार्केट से अवैध कब्जा छुड़ाने गए नगर निगम दस्ते पर कारोबारियों ने पथराव कर दिया। इसमें निगम के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमित धनखड़ सहित कई कर्मचारी घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
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दूसरी ओर निगम के एसडीओ अजय पंघाल की शिकायत पर डीएलएफ फेज एक थाना पुलिस ने छह लोगों को नामजद कर एक दर्जन के खिलाफ ड्यूटी पर कर्मचारियों से मारपीट, सरकारी काम में बाधा, पत्थरों से मारना, निगम की जमीन पर कब्जा, झगड़ा करने जैसी संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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इनमें से तीन, परमानंद मनाली, रामानंद निवासी एसबीआई कॉलोनी करनाल बाईपास, दिल्ली और शिवाजी नगर निवासी महेश अरोड़ा को घटना स्थल से गिरफ्तार कर लिया गया।
घटना बुधवार की है। नगर निगम टीम शाम के समय मार्बल मार्केट से अवैध कब्जा हटा रही थी। इसी दौरान निगम की जमीन पर रखे पत्थरों को हटाने के लिए नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार ने व्यापारियों को तीन घंटे का अल्टीमेटम दे दिया। निगमायुक्त अल्टीमेटम देने के बाद एक टीम मौके पर ही छोड़ आए।
टीम को उन्होंने निर्देश दिया कि अगर तय समय तक जमीन खाली नहीं होती है तो पत्थरों को जब्त कर लें। करीब 9.30 बजे तक भी जब पत्थर नहीं उठे तो चिकित्सा अधिकारी डॉ. धनखड़ ने शुभ ग्रेनाइट के मालिक को पत्थर हटाने की बात कही। जिस पर उन्होंने लेबर नहीं मिलने की बात कह दी।
अजय पंघाल ने अपनी शिकायत में कहा कि करीब 11.30 बजे पत्थरों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करते ही एक दर्जन से अधिक लोगों ने टीम पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। पुलिस बल साथ होने के कारण तीन लोगों को मौके पर दबोच लिया गया। बाकी फरार हो गए। एसीपी डीएलएफ दलबीर सिंह ने बताया कि तीनों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
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दूसरी ओर मार्बल कारोबारियों ने गिरफ्तारी को गलत बता कर थाने के सामने प्रदर्शन किया। इन लोगों ने आरोप लगाया कि निगम ने बाउंसरों की मदद से कारोबारियों के साथ पहले झगड़ा शुरू किया। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनका मार्बल मार्केट से कोई लेना-देना नहीं है। इन लोगों ने निगम कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत भी दी है। दलबीर सिंह ने बताया कि शिकायत पर अभी मामला दर्ज नहीं किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
गुड़गांव में सिकंदरपुर पंचायत की जमीन पर बसी मार्बल मार्केट को विस्थापित कराने के लिए प्रशासन की ओर से 11 साल से कवायद चल रही है। कानूनी दांव-पेच के चलते मार्बल कारोबारी मार्केट में बने हुए हैं।
दिल्ली से सटे सिकंदरपुर गांव की पंचायत की जमीन पर मार्बल कारोबारी 20 साल से बसे हुए हैं। कारोबारियों ने पंचायत की जमीन पर पहली लीज 1996 में ली थी। इसका समय पूरा होने के बाद दुबारा से रिनुअल किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से मार्केट के लोगों को विस्थापित करने के लिए 11 साल पहले सर्वे किया था।
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हुडा ने सर्वे के बाद सेक्टर 33-34 में मार्बल के 150 कारोबारियों को प्लॉट का आवंटन किया। हुडा की ओर से आवंटन के बाद ही बवाल खड़ा हो गया। सिंकदरपुर पंचायत की जमीन पर बैठे कारोबारियों की ओर से अदालत की शरण ली गई। इसमें आरोप लगा कि हुडा ने कुछ बड़े कारोबारियों को छोटा प्लॉट आवंटित किया।
कुछ कारोबारी जो यहां और शीतला माता रोड पर मौजूद थे उनको छोड़ दिया गया। नए आवंटन में 14 ऐसे कारोबारी को आवंटन किया गया जिनका मार्बल या गुड़गांव की मार्केट से कोई लेना देना नहीं था। कानूनी दांव-पेच का फायदा उठा कर कुछ कारोबारी दोनों जगह कब्जा किए हुए हैं और हुडा को प्लॉट का पैसा भी नहीं जमा कर रहे हैं।
निगमायुक्त डॉक्टर प्रवीण कुमार कुछ दिन पहले हुडा प्रशासक के पद पर थे। उस दौरान उन्होंने कारोबारियों को विस्थापित करने की कवायद की थी। प्रदूषण विभाग की ओर से कारोबारियों को नोटिस दिया जा चुका है। ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर सभी कारोबारी अपना कार्यालय तोड़ चुके हैं।