दिल्लीः एम्स में होगा माओवादी का इलाज
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स को एक संदिग्ध माओवादी का इलाज करने का निर्देश दिया है। संदिग्ध माओवादी को ब्रेन ट्यूमर है और एम्स में ऑपरेशन करने आया है।
कल जस्टिस विभू बखारू ने दिल्ली पुलिस और एम्स के मेडिकल ऑथारिटी को जल्द इलाज करने को कहा है। जस्टिस ने विचाराधीन 38 साल के चंदन देवनाथ का जल्द इलाज करने को कहा है। ताकि उस पर चल रहे मुकदमे की कारवाई हो सके।
कोर्ट ने यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट द्वारा दी गई अर्जी के आधार पर कहा है कि उसकी हालत बुरी है सुधार के लिए उसे मेडिकल सुविधा दी जाए।
झारखंड पुलिस ने इस बात की आलोचना की है कि देवनाथ को हौज खास पुलिस स्टेशन के बरामदे में रखा जाता है। उसे तिहाड़ में इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि उसके कुछ जरूरी प्रशिक्षण के लिए सुबह दोबारा अस्पताल आना था।
झारखंड जेल में बंद था माओवादी
इससे पहले कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और एम्स प्रसाशन से कहा कि देवनाथ का जल्द से जल्द उसका इलाज किया जाए। देवनाथ 27 नवंबर 2007 से झारखंड के सरायकेला जेल में है। उसे माओवादी गतिविधि में शामिल होने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
दलील में एक एनजीओ ने यह कहा कि देवनाथ को लकवाग्रस्त भी है और उसे हौजखास के पुलिस स्टेशन में बरामदे रखा गया है। पिछले नौ सितंबर से एम्स में अपने आए ऑपरेशन का इतंजार कर रहा है। देवनाथ ने बताया कि उसे ट्यूमर है।
देवनाथ और पीयूडीआर संस्था ने वकील रीषभ संचेती, पद्ममा प्रिया और आशीष वीरमानी की सहायता से दलील दी है कि उसे इलाज की सख्त जरूरत है, इसलिए उसे जल्द मेडिकल सुविधा दी मुहैय्या कराई जाए।
इससे पहले देवनाथ का रांची मेडिकल कालेज में डाएगनोसिस और ब्रेन ट्यूमर का इलाज चल रहा था। इसके बाद उसे दिल्ली एम्स में रेफर किया गया। जहां वह पिछले 29 अगस्त से ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है। इतने बुरी हालात में उसे पुलिस स्टेशन के बरामदे में रखा गया है।