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पैकेजिंग मटेरियल के लिए अनिवार्य हो 71 प्रतिशत रिसाइकिलिंग रेट, सरकार से की गई अपील
Sat, 20 Mar 2021 11:48 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 20 Mar 2021 11:48 PM IST
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- फोटो : social media
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खाद्य नियामक एफएसएसएआई और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तब तक किसी खाद्य पदार्थ/पेय की नई पैकेजिंग के लिए नॉन रिसाइकिल्ड और नॉन बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल (टेट्रा पैक, प्लास्टिक, ग्लास बोतल, एल्युमीनियम केन) को मंजूरी न दें, जब तक कि पैकेजिंग कंपनियां इनसे बनने वाले कचरे को एकत्र और रिसाइकिल करने के लिए ईपीआर फ्रेमवर्क के तहत जरूरी व्यवस्था न कर दें। 45 से ज्यादा बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों और एनजीओ ने सरकार से यह अपील की है।
उनका कहना है कि ऐसा किए बिना 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा। इसके लिए नए खाद्य पदार्थ/पेय के लिए किसी भी नॉन बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग मैटेरियल को मंजूरी देने से पहले 61 से 71 प्रतिशत रिसाइकिलिंग रेट का मानक तय करने का सुझाव दिया गया है।
इस अभियान की अगुआई पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच के प्रेसिडेंट व पंडित दीदयाल के भतीजे डॉ. विनोद शुक्ला, पद्मश्री व प्लास्टिक मैन ऑफ इंडिया कहे जाने वाले डॉ. आर वसुदेवन, मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर डॉ. अरुण सावंत, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. राजीव प्रताप सिंह, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं वाइस चांसलर डॉ. सी राजकुमार, राज्यसभा सदस्य डॉ. अनिल अग्रवाल समेत कई अन्य वैज्ञानिक, एनजीओ एवं बुद्धिजीवी कर रहे हैं।
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अपील करते हुए डॉ. विनोद शुक्ला ने कहा, ‘हर भारतीय को सिंगल यूज प्लास्टिक उन्मूलन के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को पाने की दिशा में योगदान करना चाहिए। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2021 से यह स्पष्ट है कि सभी सिंगल यूज प्लास्टिक एवं पैकेजिंग मैटेरियल को हटाना व्यावहारिक नहीं है, लेकिन निश्चित तौर पर उनका पर्यावरण के अनुकूल कोई विकल्प मिलने तक हम इनकी रिसाइकिलिंग कर सकते हैं।
डॉ. आर वासुदेवन ने कहा, ‘प्लास्टिक आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण पदार्थ बन गया है। यह लकड़ी, धातु, ग्लास, सिरेमिक आदि के विकल्प के रूप में सामने आया है। आज यह गरीबों की जरूरत और आम आदमी के दोस्त की तरह है। लेकिन इसके बावजूद यह कई तरह के प्रदूषण का कारण भी है।
समस्या है कचरा फैलाने की हमारी आदत और पर्यावरण के मुद्दों की अनदेखी करने का हमारा स्वभाव। हमारे यहां ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी कमजोर है। सभी पक्षों को समझना होगा कि प्लास्टिक समस्या है। ब्रांड के मालिकों के लिए 71 प्रतिशत कचरे का संग्रह और उनकी रिसाइकिलिंग लक्ष्य है।
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उनका कहना है कि ऐसा किए बिना 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा। इसके लिए नए खाद्य पदार्थ/पेय के लिए किसी भी नॉन बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग मैटेरियल को मंजूरी देने से पहले 61 से 71 प्रतिशत रिसाइकिलिंग रेट का मानक तय करने का सुझाव दिया गया है।
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इस अभियान की अगुआई पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच के प्रेसिडेंट व पंडित दीदयाल के भतीजे डॉ. विनोद शुक्ला, पद्मश्री व प्लास्टिक मैन ऑफ इंडिया कहे जाने वाले डॉ. आर वसुदेवन, मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर डॉ. अरुण सावंत, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. राजीव प्रताप सिंह, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं वाइस चांसलर डॉ. सी राजकुमार, राज्यसभा सदस्य डॉ. अनिल अग्रवाल समेत कई अन्य वैज्ञानिक, एनजीओ एवं बुद्धिजीवी कर रहे हैं।
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अपील करते हुए डॉ. विनोद शुक्ला ने कहा, ‘हर भारतीय को सिंगल यूज प्लास्टिक उन्मूलन के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को पाने की दिशा में योगदान करना चाहिए। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2021 से यह स्पष्ट है कि सभी सिंगल यूज प्लास्टिक एवं पैकेजिंग मैटेरियल को हटाना व्यावहारिक नहीं है, लेकिन निश्चित तौर पर उनका पर्यावरण के अनुकूल कोई विकल्प मिलने तक हम इनकी रिसाइकिलिंग कर सकते हैं।
डॉ. आर वासुदेवन ने कहा, ‘प्लास्टिक आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण पदार्थ बन गया है। यह लकड़ी, धातु, ग्लास, सिरेमिक आदि के विकल्प के रूप में सामने आया है। आज यह गरीबों की जरूरत और आम आदमी के दोस्त की तरह है। लेकिन इसके बावजूद यह कई तरह के प्रदूषण का कारण भी है।
समस्या है कचरा फैलाने की हमारी आदत और पर्यावरण के मुद्दों की अनदेखी करने का हमारा स्वभाव। हमारे यहां ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी कमजोर है। सभी पक्षों को समझना होगा कि प्लास्टिक समस्या है। ब्रांड के मालिकों के लिए 71 प्रतिशत कचरे का संग्रह और उनकी रिसाइकिलिंग लक्ष्य है।