दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर बैन हटा: मनजिंदर सिंह सिरसा ने ईओएल नियमों की गिनाईं कमियां, जानें लोग क्या बोले
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को पत्र लिखकर दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों को ईंधन न देने के निर्देश पर रोक लगाने को कहा है। इस मामले पर लोगों की ओर से प्रतिक्रिया भी आ रही है।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर लगा बैन हटा लिया गया है। इसे लेकर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को पत्र लिखा और राजधानी में एक जुलाई से लागू हुए एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों के नियमों की कमियां गिनाईं। साथ ही उन्होंने पुरानी गाड़ियों को फ्यूल न देने के निर्देश पर रोक लगाने को कहा। दरअसल, दिल्ली में 'एंड ऑफ व्हीकल' वाहनों के नियमों के तहत की जा रही पुरानी गाड़ियों की जब्ती पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि अभी इस नियम को इंप्लीमेंट नहीं कर रहे हैं। गाड़ियों को उम्र के हिसाब से नहीं, बल्कि पॉल्यूशन स्तर के हिसाब से बंद किया जाएगा। इस पर सरकार काम कर रही है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को पत्र लिखकर डायरेक्शन नंबर 89 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने को कहा है, जिसके तहत दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों को फ्यूल देने से मना किया गया है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि हम सीएक्यूएम से आग्रह करते हैं कि डायरेक्शन नंबर 89 के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, जब तक कि ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) प्रणाली पूरे एनसीआर में एकीकृत नहीं हो जाती। हमें विश्वास है कि दिल्ली सरकार के चल रहे बहुआयामी प्रयासों से वायु गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार आएगा।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने मीडिया से बातचीत कर कहा कि उन्होंने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को पत्र लिखकर दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों को ईंधन न देने के निर्देश पर रोक लगाने को कहा है।
उन्होंने कहा कि हमने उन्हें बताया है कि जो ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए हैं, वे मजबूत सिस्टम नहीं हैं और उनमें अभी भी कई खामियां हैं। तकनीकी गड़बड़ियां, सेंसर का काम न करना और स्पीकर का खराब होना, ये सभी कमियां हैं। इसे अभी तक एनसीआर डेटा के साथ एकीकृत नहीं किया गया है। यह हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेटों (एचएसआरपी) की पहचान करने में सक्षम नहीं है। हमने यह भी कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद और बाकी एनसीआर में अभी तक ऐसा कानून लागू नहीं किया गया है।
जानें लोगों ने क्या कहा
एक वाहन मालिक ने बातचीत के दौरान कहा कि दिल्ली के लिए सरकार जो कदम उठा रही है, वह अच्छे हैं। वाहनों से होने वाला प्रदूषण बहुत ज़्यादा है, इसलिए उठाए जा रहे कदम अच्छे हैं। अगर वाहन पुराना है, तो नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे आगे आएं। इसी तरह के कदम सभी मेट्रो शहरों में उठाए जाने चाहिए।
#WATCH | The Delhi government wrote to the Commission for Air Quality Management (CAQM) to put on hold its directive banning the sale of fuel to end-of-life vehicles (ELVs) in the capital
— ANI (@ANI) July 3, 2025
A vehicle owner says, "The steps the government is taking for Delhi are good. Pollution… pic.twitter.com/tH0LmJVmnw
वहीं दूसरे वाहन मालिक ने कहा कि मैंने 2017 में एक स्कॉटी खरीदी थी। यह फैसला उन लोगों के लिए गलत था, जो नया वाहन खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते। जब मैं किसी वाहन को प्रदूषण फैलाते देखता हूं, तो मैं उनसे कहती हूं कि वे अपना प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवा लें, क्योंकि हमें उनके कारण परेशानी उठानी पड़ती है। इसलिए सरकार का यह फैसला अच्छा है।
क्या है यह नया नियम?
दरअसल, अप्रैल 2025 में 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (CAQM) ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि 1 जुलाई से सभी 'एंड ऑफ लाइफ' (ईओएल) यानी तय उम्र पार कर चुकी गाड़ियों को फ्यूल देना बंद किया जाए। इसमें डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल और पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल की समयसीमा तय की गई है।
दिल्ली के सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर 30 जून तक ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने का आदेश दिया गया था। ये कैमरे नंबर प्लेट पढ़कर यह पहचान लेंगे कि गाड़ी कितनी पुरानी है। यदि कोई गाड़ी तय समय सीमा से ज्यादा पुरानी पाई गई, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। जो मोटर व्हीकल एक्ट, 1989 के तहत आता है। जिसके तहत कानूनी कार्रवाई होती है।
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