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मंगल-शनि की युति की वजह से नहीं हो रही बारिश
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 01 Sep 2014 11:10 PM IST
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पिछले 45 दिन से तुला राशि में शनि मंगल की युति चल रही थी। यह युति राष्ट्र और प्राणियों केलिए मंगलकारी नहीं थी। इसकी वजह से ही इस साल वर्षा भी कम हुई है। हालांकि अब इस युति से राहत मिलने वाली है और मंगल अपनी स्वराशि वृश्चिक में जाने वाले हैं।
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पंडित विष्णुदत्त सरस ने बताया कि मंगल और शनि की युति की वजह अराजकता, अल्पवृष्टि झेलना पड़ रहा था। चूंकि मंगल और शनि दोनों ही पाप और अग्निकारक ग्रह हैं और आपस में शत्रु भी हैं।
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तुला राशि का स्वामी शुक्र होता है। जो कि वर्षा का कारक ग्रह है। उसी तुला राशि में दो अग्नि कारक ग्रहों की युति होने और सिंह राशि में शुक्र के होने के कारण वर्षा का श्रेष्ठ योग नहीं बन रहा था।
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पंडित विष्णुदत्त सरस ने बताया कि इसके लिए निम्न दोहा भी है - ‘सिंह के शुक्र होई भवानी, चले पवन नहीं बरसे पानी’
उन्होंने बताया कि अब चार सितंबर की मध्य रात्रि में मंगल वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।
वृश्चिक राशि मंगल की स्वराशि है। इसमें रहकर वह श्रेष्ठ फल देंगे। शनि भी तुला में अकेले रहकर अपने उच्च स्थान का पूर्ण फल देंगे। मंगल के स्वराशि में जाने के कारण वर्षा होने की भी संभावना है, साथ ही जो अराजकता फैली है, उसमें भी कमी आएगी। यह स्थिति तुला, कर्क, वृश्चिक और मीन राशियों के लिए विशेष शुभ होगा।