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दिल्ली: मुखिया विहीन तीन अस्पताल, मैनेजर भी फेल, अतिरिक्त कार्यभार से डॉक्टर परेशान
Fri, 12 Jul 2019 05:23 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 12 Jul 2019 05:23 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय व्यवस्थाओं के लिए रखे गए मैनेजर चंद महीनों बाद ही फेल नजर आ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन में ज्यादा अनुभव नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर दिल्ली के तीन बड़े अस्पताल मुखिया विहीन हैं, जिस कारण यहां चिकित्सीय व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है।
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दिल्ली सरकार के जीबी पंत, चाचा नेहरू और दिल्ली राज्य कैंसर अस्पताल में कई महीनों से निदेशक नहीं हैं। जीबी पंत में निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय त्यागी पर है, जो जीबी पंत के कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष भी हैं। लोकनायक अस्पताल भी इनके अधीन आता है। हालांकि, यहां चिकित्सीय अधीक्षक तैनात हैं, लेकिन बड़े फैसलों में डॉ. त्यागी का दखल होना आवश्यक है। स्थिति यह है कि डॉ. त्यागी सुबह से दोपहर तक कार्डियोलॉजी विभाग में मरीजों और कागजों से जुड़ा कार्य देखते हैं। इसके बाद वे डीन ऑफिस पहुंचते हैं। जीबी पंत सुपर स्पेशियलिटी दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक है, जहां प्रबंधन का जिम्मेदार व्यक्ति नियमित होना आवश्यक है।
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ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निदेशक डॉ. बीएल शेरवाल हैं, जो पूर्व में रांची स्थित रिम्स में वरिष्ठ डॉक्टर थे। डॉ. शेरवाल इन दिनों राजीव गांधी के अलावा दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय का कार्यभार भी उनके पास है। हालांकि, यहां मदद के लिए अतिरिक्त चिकित्सीय अधीक्षक डॉ. ममता भी हैं। सूत्रों का कहना है कि इन बड़े अस्पतालों में लंबे समय से पद खाली होने के कारण मरीजों को भी परेशानी हो रही हैं। यदि किसी तरह की शिकायत लेकर मरीज निदेशक से मिलना भी चाहे तो वह इधर-उधर भटकता रहता है। सूत्रों का कहना है कि डॉ. संजय त्यागी और डॉ. शेरवाल इस बाबत स्वास्थ्य विभाग को भी लिखित में सूचित कर चुके हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव संजीव खैरवार का कहना है कि इस मामले में वे संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे।
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दिल्ली के लोकनायक अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि कुछ माह पहले अस्पताल में करीब 60 से 70 मैनेजरों को नियुक्त किया था, जिन्हें उन पदों पर जिम्मेदारी दी गई जो पहले से कोई ना कोई डॉक्टर देख रहे थे। ऐसा इसलिए किया गया था कि प्रशासनिक कार्यों में उलझे बिना डॉक्टर मरीजों का बेहतर उपचार कर सकें, लेकिन ड्यूटी पर तैनात मैनेजरों को सरकारी अस्पताल के प्रबंधन का अनुभव ना होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन भी काफी परेशान है। दूसरी ओर जीबी पंत अस्पताल में निदेशक पद को लेकर दो वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच विवाद भी चल रहा है। इसी विवाद में एक तीसरे व्यक्ति ने अपना नाम विभाग तक पहुंचाने का जोर लगा दिया है। चूंकि, यह गैर शैक्षणिक क्षेत्र से है, इसलिए बीते दिनों जीबी पंत के सभी फैकल्टी सदस्यों विभागीय अधिकारियों से इन्हें जिम्मेदारी नहीं देने की अपील की थी।