डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के सामने खुद को उड़ाया
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फरीदाबाद में सरकारी अधिकारियों व पुलिस प्रताड़ना से त्रस्त एक बुजुर्ग ने सोमवार दोपहर लघु सचिवालय स्थित जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर खुद को गोली से उड़ा लिया। आत्महत्या के लिए उसने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर का प्रयोग किया।
परिजनों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के एसडीओ शिव कुमार डागर, पीडब्लूडी के जेई राम प्रकाश और सेंट्रल थाना एसएचओ मुकेश कुमार द्वारा प्रताड़ित करने पर ही बुजुर्ग ने आत्महत्या की है। इसके बाद सनसनी फैल गई और भगदड़ के हालात पैदा हो गए।
मृतक वेद प्रकाश चंदीला उर्फ वेदी (59) अपने परिवार के साथ बड़ौली गांव में रहता था। मृतक के बड़े भाई ब्रहम प्रकाश ने बताया कि वेद प्रकाश का एक बेटा संजय है, जो तावड़ू में हवलदार है।
एसएचओ ने दी थी घर तोड़ने की धमकी
चंदीला के भतीजे अजेंद्र के अनुसार वेद प्रकाश का सेक्टर-9 बाइपास रोड पर जमीन है, जिसमें वह कुछ दिनों से निर्माण कार्य करा रहे थे।
ब्रह्म प्रकाश का आरोप है कि वेद प्रकाश के निर्माण कार्य को अवैध बता कर सिंचाई विभाग के एसडीओ शिव कुमार डागर, पीडब्लूडी के जेई राम प्रकाश और सेंट्रल थाना एसएचओ मुकेश कुमार उन्हें पिछले कई दिनों से प्रताड़ित कर रहे थे। वेद प्रकाश को काम न करने व फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी जा रही थी।
बताया गया है उक्त अधिकारियों से त्रस्त हो कर वेद प्रकाश सोमवार दोपहर करीब 12:30 बजे लघु सचिवालय में उपायुक्त से मिलने पहुंचा था। मौके पर मौजूद अधिवक्ता शिवदत्त वशिष्ठ ने बताया कि घटना से कुछ देर पहले ही वेद प्रकाश उपायुक्त कार्यालय के बाहर उनसे मिले थे।
जैसे ही जीने से उतरने लगे, उन्हें गोली चलने की आवाज आई। उन्होंने मौके पर जा कर देखा तो वेद प्रकाश की मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। खबर लिखे जाने तक मामला दर्ज नहीं हुआ था।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सोमवार को सेक्टर-12 लघु सचिवालय के प्रथम तल पर डीसी आफिस के सामने खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने वाला वेद प्रकाश उर्फ ‘वेदी’ रिवाल्वर लेकर आखिर वहां तक कैसे पहुंच गया। जबकि इस परिसर में पुलिस कर्मियों को छोड़कर किसी को भी शस्त्र की अनुमति नहीं है।
पूर्व जिला उपायुक्त बलराज सिंह मोर ने गत दिनों कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद सभी सरकारी कार्यालयों खासकर लघु सचिवालय में हथियार ले जाने पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद इस तरह की घटना से जिला और पुलिस प्रशासन दोनों सवालों के घेरे में हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि यदि पीड़ित परेशान होकर किसी अधिकारी को निशाना बना
देता तो उसका जिम्मेदार कौन होता, लेकिन इस बात का जवाब किसी के पास नहीं
है। घटना के संबंध में जिला उपायुक्त विजय सिंह दहिया से बात की गई तो
उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
इस घटना के
बाद से पूरे लघु सचिवालय की सुरक्षा सवालों के घेरे में है। यहां न तो कोई
अधिकारी-कर्मचारी सुरक्षित है और न ही आम आदमी। जबकि इस भवन में ग्राउंड
फ्लोर पर गेट के पास भारतीय स्टेट बैंक की शाखा है और पुलिस सहायता केंद्र
बना हुआ है। बावजूद इस भवन में आने-जाने वालों की जांच पड़ताल तक नहीं की
जाती है।