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प्रेमिका से हैवानियत करने वाले को उम्रकैद

Mon, 02 Jun 2014 07:47 AM IST
Updated Mon, 02 Jun 2014 07:47 AM IST
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Man Sentenced to Life for Acid Attack on Lover in delhi

साल 2006 में एसिड हमले से प्रेमिका की मौत के मामले में रोहिणी जिला अदालत ने शुक्रवार को वैशाली (बिहार) निवासी अजय भारती को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार गोयल ने उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अजय ने बेहद नियोजित तरीके से महिला की जिंदगी बर्बाद करने के इरादे से उस पर हमला किया था।
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अदालत ने यह भी कहा कि एसिड अटैक महिलाओं पर होने वाली हिंसा का सबसे खतरनाक रूप है और यह देश में लगातार बढ़ रहा है।

पार्क में बुलाकर डाला था तेजाब

Man Sentenced to Life for Acid Attack on Lover in delhi

अभियोजन के मुताबिक अजय व महिला के बीच संबंध थे। अजय को शक था कि उसकी प्रेमिका का किसी अन्य शख्स से भी प्रेम प्रसंग चल रहा है। 20 जनवरी 2006 को उसने प्रेमिका को रोहिणी स्थित जापानी पार्क बुलाया और वहां उस पर एसिड फेंककर भाग गया था।

महिला शादीशुदा थी और उसके बच्चे थे। एसिड अटैक से उसका शरीर 40 फीसदी शरीर झुलस गया था।

एक सप्ताह बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई थी। प्र्रशांत विहार थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज उसे गिरफ्तार कर लिया था।

रेप का आरोपी 15 साल बाद बरी

Man Sentenced to Life for Acid Attack on Lover in delhi

दुष्कर्म के पंद्रह साल पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता व आरोपी के बीच शारीरिक संबंध सहमतिपूर्ण थे। निचली अदालत ने याची को सात साल कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

जस्टिस इंदरमीत कौर की पीठ ने जिला अदालत के 2001 के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसके तहत मूल रूप से बिहार निवासी रामेश्वर गिरी को अपहरण व दुष्कर्म का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 की परिभाषा के मद्देनजर दुष्कर्म के मामले में पीड़िता के नाबालिग होने के लिए उसकी आयु सोलह से कम होनी चाहिए।

इस मामले में पीड़िता की आयु दुष्कर्म की घटना के समय सोलह साल से महज तीन माह कम थी। इस नाते वह आरोपी के साथ जाने के कृत्य के नतीजों की पूर्ण जानकारी थी और उससे कोई जबरदस्ती नहीं की गई।

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