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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Man found guilty of giving away secret information about defence equipment for Rs 80,000

Delhi NCR News: 80 हजार रुपये में दे दी रक्षा उपकरणों की गुप्त जानकारी, दोषी करार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 06:55 PM IST
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- राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व रक्षा मंत्रालय कर्मचारी को दोषी ठहराया
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- समाचार पत्रिका के प्रतिनिधियों ने विदेशी कंपनी के प्रतिनिधि बनकर की थी मुलाकात
- वर्ष 2000 में स्टिंग के दौरान आरोपी ने 80 हजार रुपये की रिश्वत लेकर दी थी जानकारी

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने न्यूज मैग्जीन के स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व रक्षा मंत्रालय कर्मचारी पी. सासी को दोषी ठहराया है। विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने अपने फैसले में सासी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 9 और 13(1)(डी) के साथ 13(2) के तहत दोषी करार दिया। इस मामले में अधिकतम सात वर्ष तक की कैद हो सकती है।

मामला 2000 का है, जब न्यूज पोर्टल तहलका. कॉम ने रक्षा खरीद में भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन किया था। पत्रकार अनिरुद्ध बहल और मैथ्यू सैमुअल ने खुद को लंदन की फर्जी कंपनी 'वेस्टएंड इंटरनेशनल' का प्रतिनिधि बताकर सासी से संपर्क किया। सासी उस समय रक्षा मंत्रालय के ऑर्डनेंस सर्विसेज डायरेक्टरेट में असिस्टेंट के पद पर तैनात था। अभियोजन के अनुसार, सासी ने कई बैठकों में कंपनी के प्रतिनिधियों को हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर्स (एचएचटीआई) और अन्य रक्षा उपकरणों से जुड़ी गोपनीय जानकारी और दस्तावेज दिए। बदले में उन्होंने 80,500 रुपये की रिश्वत ली, साथ ही कुछ और राशि भी स्वीकार की। सासी ने अपने बॉस कर्नल अनिल सहगल और अन्य अधिकारियों से मिलवाने का वादा भी किया और रिश्वत की मांग की। ये बैठकें सासी के घर, सहगल के आवास, होटलों और सार्वजनिक स्थानों पर हुईं, जिन्हें 12 वीडियो टेप में रिकॉर्ड किया गया।
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2004 में दर्ज हुआ मुकदमा
सीबीआई ने 2004 में मामला दर्ज किया था, जब सरकार ने जांच आयोग को भंग कर जांच एजेंसी को सौंपी। फोरेंसिक जांच में टेप असली पाए गए और सासी की आवाज व छवि की पुष्टि हुई। अदालत ने गवाहों की गवाही, वीडियो सबूत और दस्तावेजों के आधार पर सासी को दोषी माना। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि स्टिंग ऑपरेशन अवैध था और सासी को फंसाया गया, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
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