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Malviya Nagar fire: लपटों में घिरे होटल से जिंदगियां खींच लाए मोहल्ले के लड़के, अंगारों को चीरकर दिया जीवनदान
Thu, 04 Jun 2026 04:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सचिन कुमार, नई दिल्ली
सचिन कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 04 Jun 2026 04:05 AM IST
सार
उसी वक्त मोहल्ले के कुछ युवा बिना अपनी जान की परवाह किए जलते होटल की ओर दौड़ पड़े। किसी ने सीढ़ियां लगाईं, किसी ने लोगों को कंधों पर उठाकर बाहर निकाला, तो कोई सड़क पर बेहोश पड़े लोगों और पुलिसकर्मियों को सीपीआर देकर उनकी सांसें लौटाने में जुटा गया।
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मालवीय नगर होटल अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल की खिड़कियों से उठती लपटें, धुएं में घुटती सांसें और अंदर से आती मदद की चीखें…। इस भयावह मंजर को देखकर हर किसी के रोंगटे खड़े थे लेकिन उसी वक्त मोहल्ले के कुछ युवा बिना अपनी जान की परवाह किए जलते होटल की ओर दौड़ पड़े। किसी ने सीढ़ियां लगाईं, किसी ने लोगों को कंधों पर उठाकर बाहर निकाला, तो कोई सड़क पर बेहोश पड़े लोगों और पुलिसकर्मियों को सीपीआर देकर उनकी सांसें लौटाने में जुटा गया। 21 मौतों के इस हादसे के बीच इन युवाओं ने साहस दिखाकर करीब 30 से 40 लोगों को नई जिंदगी दे दी।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही इन युवाओं ने लोगों को बचाने का अभियान शुरू कर दिया था। कुछ युवक होटल के भीतर घुस गए, जबकि कुछ ने बाहर बचाव की तैयारी शुरू कर दी। आसपास की दुकानों और घरों से गद्दे, कंबल और चादर लाकर होटल के नीचे बिछाई गई ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों की जान बचाई जा सके। आग लगने की खबर फैलते ही आसपास के लोग होटल के बाहर जमा होने लगे। हर कोई डरा था। होटल के अंदर से मदद के लिए आवाजें आ रही थीं। इसी बीच असरार खान, वकार, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद शोएब खान, वसीम राजा और उनके साथियों ने हालात देखते हुए खुद राहत कार्य शुरू कर दिया।हादसे की प्रत्यक्षदर्शी शबीना खान ने बताया कि उस समय किसी को अपनी जान की परवाह नहीं थी।
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सभी की कोशिश केवल इतनी थी कि किसी तरह होटल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। स्थानीय युवा वकार ने बताया कि आग लगने के कारण ऊपर खड़े लोग डर चुके थे। धुआं इतना था कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हम लोगों ने नीचे गद्दे बिछाए और ऊपर वालों को आवाज लगाई कि अगर निकलने का कोई रास्ता नहीं है तो नीचे कूद जाएं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोगों ने तीसरी और चौथी मंजिल से छलांग लगाई। नीचे मौजूद युवाओं ने गद्दों को लगातार इधर-उधर खिसकाकर गिरने वाले लोगों को संभाला। अगर गद्दे नहीं बिछाए जाते तो ऊपर से कूदने वाले अधिकांश लोग गंभीर रूप से घायल हो सकते थे।
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धुएं में घुटती सांसों को सीपीआर से दिया सहारा
आग और धुएं के कारण कई लोगों की सांसें थमने लगी थीं। कुछ लोग बेहोश होकर गिर गए थे। स्थानीय युवा मोहम्मद शोएब खान ने बताया कि जब लोगों को बाहर निकाला गया तो कई लोग सांस नहीं ले पा रहे थे। कुछ की नब्ज बहुत कमजोर थी। ऐसे में हमने तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि इलाके के कुछ युवाओं को पहले से प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर की जानकारी थी। हमने कई लोगों को सीपीआर दी तो कुछ मिनट बाद उनकी सांसें वापस चलने लगीं। उस समय ऐसा लगा जैसे ईश्वर ने उन्हें दूसरी जिंदगी दे दी हो।
मुंह पर कपड़ा बांधा और घुंस गए होटल में
स्थानीय युवा मोहम्मद अफजल उन युवाओं में शामिल थे जो होटल के भीतर घुसे। उन्होंने बताया कि जैसे ही हम सभी अंदर पहुंचे तो धुएं की वजह से सांस लेना मुश्किल हो गया। आंखों में जलन होने लगी। सीढ़ियां गर्म हो चुकी थीं। कई लोग कमरों के बाहर बेहोश पड़े मिले। अफजल के अनुसार, स्थानीय युवाओं ने अपने मुंह पर कपड़ा बांधा और एक-एक मंजिल पर जाकर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने कई लोगों को कंधों पर उठाकर नीचे पहुंचाया। कुछ लोग घबराहट में रो रहे थे, कुछ बेहोश थे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि बाहर कैसे निकलें। राहत एवं बचाव के दौरान कई पुलिसकर्मी धुएं और गर्मी के कारण बेहोश हो गए थे। स्थानीय युवा वसीम राजा ने बताया ने बताया कि कुछ पुलिस वाले अंदर जाकर लोगों को निकाल रहे थे। उसी दौरान धुएं से उनकी हालत खराब हो गई। दो-तीन पुलिसकर्मी बाहर आते ही गिर पड़े। उन्होंने बताया कि हमने तुरंत उन्हें जमीन पर लिटाया और सीपीआर देना शुरू किया। कुछ देर बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। उस समय कोई यह नहीं सोच रहा था कि सामने पुलिस वाला है या आम नागरिक। सबकी जान बराबर थी। जो भी सांस नहीं ले पा रहा था, हम उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे।
युवाओं से बातचीत
जब हमने होटल से धुआं निकलते देखा तो समझ गए कि अंदर फंसे लोगों के पास ज्यादा समय नहीं है। ऊपर से लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हम कुछ साथी तुरंत होटल के अंदर घुस गए। धुएं की वजह से सांस लेना मुश्किल था, लेकिन लोगों की जान बचाना जरूरी था। कई लोग बेहोश पड़े थे। हमने उन्हें कंधों पर उठाकर बाहर निकाला।
- असरार खान
होटल की ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग बेहद घबराए हुए थे। कई लोग खिड़कियों से बाहर झांक रहे थे और मदद मांग रहे थे। हमने आसपास के घरों और दुकानों से गद्दे इकट्ठा किए और नीचे बिछा दिए ताकि अगर कोई कूदे तो उसकी जान बच सके। कुछ लोग तीसरी और चौथी मंजिल से नीचे कूदे। हम उन्हें संभालते रहे।
- वकार
जब हम होटल के अंदर पहुंचे तो हर तरफ धुआं ही धुआं था। कई कमरों के दरवाजे बंद थे। हमने लोगों को आवाज लगाई और बाहर निकलने का रास्ता बताया। कुछ लोग घबराहट में रो रहे थे। कई विदेशी नागरिक भाषा नहीं समझ पा रहे थे, इसलिए हम इशारों से उन्हें बाहर आने के लिए कहते रहे। नीचे लाने के बाद कुछ लोगों की हालत बहुत खराब थी।
-मोहम्मद अफजल
मैंने पहले सीपीआर का प्रशिक्षण लिया था, इसलिए जब लोगों को बाहर निकाला गया और उनकी सांसें रुकती हुई दिखाई दीं तो तुरंत समझ गया कि क्या करना है। हमने एक-एक करके कई लोगों को सीपीआर दिया। कुछ लोग पूरी तरह बेहोश थे। उनके परिजन और साथी घबराए हुए थे। हम उन्हें हिम्मत भी देते रहे और उपचार भी करते रहे।
-मोहम्मद शोएब खान
आग इतनी तेजी से फैली थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। जब हम मौके पर पहुंचे तो अफरा-तफरी का माहौल था। कुछ लोग होटल से बाहर निकल चुके थे, लेकिन कई लोग धुएं की वजह से बेहोश होकर गिर रहे थे। हमने उन्हें खुले स्थान पर लिटाया और सीपीआर देना शुरू किया। राहत कार्य के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी धुएं का शिकार हो गए।
-वसीम