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Delhi NCR News: 105 वर्ग मीटर तक के भवनों के नियमितीकरण में बड़ी राहत, निरीक्षण की बाध्यता खत्म
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एमसीडी ने भवन नियमितीकरण प्रक्रिया की आसान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।राजधानी में भवन नियमितीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एमसीडी ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। निगम ने 105 वर्ग मीटर यानी लगभग 127 वर्ग गज तक के भवनों के नियमितीकरण के लिए अभियंताओं के निरीक्षण की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इस निर्णय से छोटे भवन मालिकों को लंबे समय से चली आ रही जटिल प्रक्रिया और अनावश्यक देरी से राहत मिलने की उम्मीद है।
एमसीडी के अनुसार, अब 105 वर्ग मीटर तक के भवनों के नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत भवन स्वामी को केवल अधिकृत आर्किटेक्ट द्वारा प्रमाणित अंडरटेकिंग जमा करनी होगी और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके बाद एमसीडी तय समयसीमा के भीतर नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी करेगा।
महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि यह फैसला नागरिकों की सुविधा और प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर निरीक्षण की अनिवार्यता के कारण कई मामलों में अनावश्यक देरी होती थी, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती थी। नई प्रणाली लागू होने से समय की बचत होगी और लंबित मामलों के निपटान में तेजी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से नागरिकों के समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही नियमितीकरण मामलों के त्वरित निस्तारण से निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।राजधानी में भवन नियमितीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एमसीडी ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। निगम ने 105 वर्ग मीटर यानी लगभग 127 वर्ग गज तक के भवनों के नियमितीकरण के लिए अभियंताओं के निरीक्षण की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इस निर्णय से छोटे भवन मालिकों को लंबे समय से चली आ रही जटिल प्रक्रिया और अनावश्यक देरी से राहत मिलने की उम्मीद है।
एमसीडी के अनुसार, अब 105 वर्ग मीटर तक के भवनों के नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत भवन स्वामी को केवल अधिकृत आर्किटेक्ट द्वारा प्रमाणित अंडरटेकिंग जमा करनी होगी और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके बाद एमसीडी तय समयसीमा के भीतर नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी करेगा।
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महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि यह फैसला नागरिकों की सुविधा और प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर निरीक्षण की अनिवार्यता के कारण कई मामलों में अनावश्यक देरी होती थी, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती थी। नई प्रणाली लागू होने से समय की बचत होगी और लंबित मामलों के निपटान में तेजी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से नागरिकों के समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही नियमितीकरण मामलों के त्वरित निस्तारण से निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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